2 साल से टीचर को नहीं मिली सैलरी, कहा- आर्थिक स्थिति खराब, आत्महत्या कर लेंगे; मुरैना में कलेक्टर से लगाई गुहार

शिक्षक ने कहा है कि वेतन पर रोक लगाए जाने के कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. अब मेरी और मेरे परिवार की स्थिति भूखे मरने पर आ गई है. अगर मेरा वेतन नहीं मिली तो मुझे परिवार समेत आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
The victim teacher said that despite the complaint, he has not been paid his salary for two years.

पीड़ित टीचर ने बताया कि शिकायत के बाद भी उन्हें 2 साल से सैलरी नहीं दी गई है.

इनपुट- मनोज शर्मा

MP News: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक टीचर ने आरोप लगाया है कि उसकी दो साल से सैलरी नहीं मिली है. कैलारस विकासखंड में पदस्थ एक प्राथमिक शिक्षक ने जिला शिक्षा अधिकारी पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना और मनमाने तरीके से वेतन रोकने का आरोप लगाया है. इसको लेकर टीचर ने कलेक्टर ने गुहार लगाई है. शिक्षक परशुराम कुशवाह ने आवेदन देकर निष्पक्ष कार्रवाई और वेतन पर लगी रोक हटाने की मांग की है

शिकायत के बाद भी नहीं मिल पाई सैलरी

परशुराम कुशवाह ने अपने आवेदन में बताया है कि माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर के आदेश के पालन में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 23 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर उन्हें डी.एड. उत्तीर्ण करने हेतु तीन वर्ष का अवसर दिया गया था. साथ ही रुका हुआ वेतन जारी करने का आदेश भी पारित किया गया था. शिकायत के अनुसार बाद में 18 मार्च 2026 को उसी आदेश को बिना किसी सक्षम उच्च अधिकारी या न्यायालय के स्थगन आदेश के निरस्त कर दिया गया. आवेदक ने आरोप लगाया कि केवल अपील प्रस्तावित होने के आधार पर किसी आदेश को निरस्त नहीं किया जा सकता, जब तक न्यायालय से स्पष्ट स्थगन आदेश प्राप्त न हो.

‘मजबूर होकर आत्महत्या करनी पड़ेगी’

परशुराम कुशवाह ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में जनसुनवाई में शिकायत करने के बाद दबाव बनाकर उनके पक्ष में हुए आदेश को निरस्त कराया गया. उन्होंने कहा कि मामले की जांच अधूरी रखी गई और संबंधित जांच अधिकारी को आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई. आवेदन में शिक्षक ने कहा है कि वेतन पर रोक लगाए जाने के कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. अब मेरी और मेरे परिवार की स्थिति भूखे मरने पर आ गई है. अगर मेरा वेतन नहीं मिली तो मुझे परिवार समेत आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि 18 मार्च 2026 का निरस्तीकरण आदेश तत्काल प्रभाव से रद्द कर 23 जनवरी 2026 का आदेश पुनः प्रभावी किया जाए. संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाए.

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