India First Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को मिली मंजूरी, जानिए किस रूट पर दौड़ेगी और क्या होंगी सुविधाएं

India First Hydrogen Train: फिलहाल इस ट्रेन का संचालन केवल जींद और सोनीपत सेक्शन के बीच ही किया जाएगा. ट्रेन की देखरेख और मरम्मत का काम दिल्ली के शकूरबस्ती डिपो में होगा. रेलवे ने इसके लिए कई सुरक्षा नियम भी तय किए हैं.
India First Hydrogen Train

हाइड्रोजन ट्रेन

First Hydrogen Train Route: रेल मंत्रालय ने देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को मंजूरी दे दी है. यह 10 कोच वाली डीईएमयू ट्रेन होगी, जो करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी. इस ट्रेन को उत्तरी रेलवे के जींद और सोनीपत रूट पर चलाया जाएगा. खास बात यह है कि यह ट्रेन डीजल ट्रेनों की तरह धुआं या प्रदूषण नहीं फैलाएगी, इसलिए इसे पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित और बेहतर माना जा रहा है. रोज सफर करने वाले यात्रियों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को भी इससे फायदा मिलेगा.

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत

  • देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में कुल 10 कोच लगाए गए हैं और यह ब्रॉड गेज रेलवे ट्रैक पर दौड़ेगी.
  • यह ट्रेन काफी शांत तरीके से चलेगी, जिससे यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा.
  • ट्रेन में दो पावर कार लगाई गई हैं, जिनमें हर एक की क्षमता 1200 किलोवाट है.
  • यानी पूरी ट्रेन को कुल 2400 किलोवाट की ताकत मिलेगी.
  • इसके अलावा इसमें 8 यात्री कोच भी जोड़े गए हैं.
  • यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल ट्रेन होगी, क्योंकि इससे केवल पानी की भाप निकलेगी और किसी तरह का प्रदूषण नहीं होगा.

हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलेगी?

  • बता दें कि यह ट्रेन डीजल या सामान्य बिजली से नहीं चलेगी.
  • इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जो बिजली पैदा करेगी.
  • इस तकनीक से करीब 1200 किलोवाट बिजली तैयार होगी.
  • ट्रेन में DPRS यानी डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक सिस्टम लगाया गया है, जिससे पूरी ट्रेन में समान रूप से बिजली सप्लाई होती रहेगी.
  • इस ट्रेन के इस्तेमाल से डीजल की खपत कम होगी और कार्बन उत्सर्जन भी लगभग खत्म हो जाएगा.

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संचालन को लेकर नियम

फिलहाल इस ट्रेन का संचालन केवल जींद और सोनीपत सेक्शन के बीच ही किया जाएगा. ट्रेन की देखरेख और मरम्मत का काम दिल्ली के शकूरबस्ती डिपो में होगा. रेलवे ने इसके लिए कई सुरक्षा नियम भी तय किए हैं. शुरुआती तीन महीनों तक ट्रेन के साथ विशेष तकनीकी स्टाफ मौजूद रहेगा, ताकि रास्ते में आने वाली किसी भी तकनीकी दिक्कत को तुरंत ठीक किया जा सके. इसके अलावा हाइड्रोजन प्लांट की 24 घंटे निगरानी की जाएगी और ट्रेन में लगे सेंसर की समय-समय पर सफाई और जांच भी की जाएगी.

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