ममता और अभ‍िषेक की खास सायोनी घोष ने क्‍यों की बगावत? लिस्ट सामने आने के बाद टाइम‍िंग पर उठे सवाल

Saayoni Ghosh Rebel List:पश्‍च‍िम बंगाल में बगावत की पटकथा चुनाव नतीजों के 14 दिन बार ही लिखी जा चुकी थी. इस बात का पुष्‍टि नए लैटर से हुई है, जिसमें सभी बागी सांसदों के नाम शामिल हैं. 
सयोनी घोष

सयोनी घोष

Mamata Abhishek Trust Broken:पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही उठापटक लगातार गहराती जा रही है. विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों के बगावत के बाद लोकसभा के बागी 19 सांसदों का लेटर शुक्रवार को सामने आया है. सबसे खास बात यह है कि भले ही यह ल‍िस्‍ट अभी सामने आई हो. लेकिन बगावत की पटकथा 18 को ही लिखी जा चुकी थी. इस लिस्ट में सयोनी घोष के नाम ने न स‍िर्फ ममता और अभिषेक को झटका दिया. बल्कि हर कोई यह देखकर हैरान हो गया.

सायोनी घोष लंबे समय से अभिषेक बनर्जी की भरोसेमंद सहयोगी मानी जाती रही हैं. अभिषेक के युवा संगठन की कमान भी उनके हाथों में रही और कई बड़े राजनीतिक अभियानों में उन्होंने अग्रिम भूमिका निभाई थी. ऐसे में उनका नाम बागी सांसदों की सूची में आने को TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

क्‍यों छोड़ा सयोनी ने ममता का साथ

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सायोनी घोष सचमुच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से दूरी बना चुकी हैं या फिर यह राजनीतिक संकट अभी और नए मोड़ लेने वाला है. लेकिन, इतना तय है कि TMC के भीतर चल रही यह खींचतान पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा असर डाल सकती है.

कभी सयोनी घोष ने कहा था कि ममता दीदी को 2029 में प्रधानमंत्री बनाना है.  राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि जिस तरह चुनावों के बाद टीएमसी टूटी है, उसके बाद सायोनी घोष बागी खेमे में रहने को अधिक सुरक्षित मान रही हैं.अब उनके पलट जाने के पीछे की वजह टीएमसी का सत्ता में न होना माना जा रहा है.

सांसदों के साथ दो तिहाई नेताओं का समर्थन

बताया जा रहा है कि बागी सांसदों का दावा है कि उनके साथ लोकसभा में पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं.  यदि यह संख्या बरकरार रहती है तो यह तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल में बड़ी टूट साबित हो सकती है. बागी गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग समूह के रूप में मान्यता की मांग भी की है. 

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