Kanker: महुआ वृक्ष के नीचे हुई भिमाल पेन देवता की शादी, अच्छी बारिश और भरपूर फसल की कामना

Kanker: कांकेर जिल के आमाटोला गांव में बारिश, कृषि और समृद्धि के देवता माने जाने वाले भिमाल पेन की विवाह रस्म पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई.
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भिमाल पेन देवता की शादी

Kanker: आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत स्वरूप कांकेर जिले के आमाटोला गांव में देखने को मिला, जहां बारिश, कृषि और समृद्धि के देवता माने जाने वाले भिमाल पेन की विवाह रस्म पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई. ग्रामीणों ने अच्छी बारिश, भरपूर फसल और गांव की खुशहाली की कामना करते हुए पारंपरिक पूजा-विधि और रीति-रिवाज निभाए. कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं और युवतियों के लोकगीतों से हुई. पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं गीत गाते हुए महुआ वृक्ष के नीचे पहुंचीं, जहां गांव के बुजुर्ग और युवा पहले से मड़वा तैयार कर चुके थे.

पारंपरिक रस्में पूरी की गई

इसके बाद महिलाओं ने भिमाल पेन को पानी से स्नान कराया और सरसों का तेल अर्पित किया, गांव के गयता ने विधि-विधान के साथ हल्दी, तेल और अन्य पारंपरिक रस्में पूरी की गई है. विवाह की तरह एक-एक कर सभी रीति-रिवाज निभाए गए. ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर पुरुषों और महिलाओं ने सामूहिक नृत्य कर उत्सव को और जीवंत बना दिया, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता की भावना का प्रतीक मानी जाती है.

भिमाल पेन की आराधना से समय पर होती है वर्षा

आदिवासी समाज में मान्यता है कि भिमाल पेन की आराधना से समय पर वर्षा होती है, खेतों में हरियाली आती है और किसानों के घर खुशहाली बनी रहती है. यही कारण है कि यह परंपरा पीढ़ियों से जीवित है और आज भी युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है. महुआ वृक्ष के नीचे संपन्न होने वाली यह विवाह रस्म केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जल, जंगल और जमीन के प्रति आदिवासी समाज की गहरी आस्था , प्रकृति संरक्षण की सोच और सामुदायिक जीवन मूल्यों का प्रतीक भी है.

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