किसानों की समस्या को लेकर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, खंडवा में खदेड़ने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया

कांग्रेस नेता सोनू गुर्जर ने कहा मध्य प्रदेश में चारों तरफ अफरा-तफरी मची रही है, जैसे आप लोगों ने गेहूं तुलाई में देखी होगी. इसी प्रकार मूंग में अह अफरा-तफरी मच रही है.
Aggressive protest by the Congress in Khandwa.

खंडवार में कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन.

Input- शेख शकील

MP News: खंडवा के केवलाराम चौक पर आज किसान कांग्रेस ने प्रदेश में सरकारी खरीदी सुनिश्चित करने और किसान-विरोधी बताई जा रही ई-टोकन प्रणाली को तत्काल बंद करने की मांग को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान पुलिस से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच झूमा झटकी हुई. पुलिस ने पानी की बौछार भी की.

‘सरकार तानाशाही कर रही है’

आंदोलन के दौरान किसान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुतले फूंके. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ई-टोकन व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह रहे हैं. उन्होंने सरकार से ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने की मांग की.

कांग्रेस नेता सोनू गुर्जर ने कहा मध्य प्रदेश में चारों तरफ अफरा-तफरी मची रही है, जैसे आप लोगों ने गेहूं तुलाई में देखी होगी. इसी प्रकार मूंग में अह अफरा-तफरी मच रही है. एक बीघा, एक एकड़ का 7 से 8 क्विंटल मूंग होता है. इसके पहले ऐसी दोहरी नीति कभी नहीं थी. मुख्यमंत्री की इतनी तानाशाही है, 1 क्विंटल 20 किलो 1 एकड़ का ले रहे हैं. पैदावार हो रही है 7 से 8 क्विंटल. तो वह किसान कहां जाएगा?

‘5 हजार का पेट्रोल फूंकने पर खाद की एक बोरी मिलती है’

गुर्जर ने कहा कि ​डीएपी एक भी गांव जाओ, सोसाइटी जाओ, मिलता ही नहीं है. ई-टोकन का बहाना लेते हैं. सर्वर डाउन है, ये डाउन है. एक आदमी को 50 चक्कर लगाना पड़ता है. एक आदमी को खाद की बोरी चाहिए तो पहले 5,000 का पेट्रोल फूंको, टू-व्हीलर से जाना है तो 5,000 का पेट्रोल फूंको जब दो बोरी मिलती है. 50 चक्कर जाना पड़ता है. इनके पास खाद है नहीं, डीएपी खाद है नहीं. पोटाश पर 3 महीने के अंदर ₹200 बढ़ा दिए, ये क्या तानाशाही है?

हमारे किसान परिवार को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिला, तो आने वाले समय में हम कलेक्टर साहब को अवगत कराना चाहते हैं, घुटने के बल दादाजी मंदिर से कलेक्टर ऑफिस जाएंगे. यह हमारे किसान परिवार का सामूहिक मीटिंग हुई है कि अब बात नहीं सुनी, तो खंडवा की गलियों में किसान घुटने के बल कलेक्टर ऑफिस आएगा.

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