लघु दंड मिलने पर निलंबन अवधि का मिलेगा पूरा वेतनः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
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बिलासपुर. विभागीय जांच में लघु दंड मिलने की स्थिति में निलंबन अवधि को अनुचित मानते हुए संबंधित कर्मचारी को उस अवधि का पूरा वेतन देने का अधिकार है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसी महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ रायपुर में पदस्थ एक सहायक उपनिरीक्षक की याचिका मंजूर कर ली है. न्यायालय ने पुलिस विभाग को याचिकाकर्ता को निलंबन अवधि का 100 प्रतिशत वेतन देने के निर्देश दिए हैं.
मामला रायपुर निवासी सहायक उपनिरीक्षक नाजमा खान से जुड़ा है, जो पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर में पदस्थ हैं. व्यक्तिगत कारणों से अवकाश के लिए दिए गए आवेदन की स्वीकृति नहीं मिलने के बाद उन्हें सेवा से अनुपस्थित मानते हुए निलंबित कर दिया गया था.
बाद में विभागीय कार्रवाई के दौरान नाजमा खान को निलंबन से बहाल कर दिया गया. हालांकि, उन्हें एक वर्ष के लिए एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का लघु दंड दिया गया. इसके साथ ही निलंबन अवधि को निलंबन में शामिल रखते हुए उस अवधि के लिए केवल 50 प्रतिशत वेतन देने का आदेश जारी किया गया.
इस आदेश के खिलाफ नाजमा खान ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और सुंदरा साहू के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की. याचिका में तर्क दिया गया कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 23 नवंबर 2010 को जारी परिपत्र के अनुसार, यदि किसी शासकीय कर्मचारी को निलंबन से बहाली के बाद केवल लघु दंड दिया जाता है तो निलंबन को उचित नहीं माना जा सकता. ऐसी स्थिति में कर्मचारी निलंबन अवधि के पूरे वेतन का पात्र होता है.
मामले की अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्क को स्वीकार कर लिया. न्यायालय ने पाया कि नाजमा खान को बहाली के बाद केवल एक वेतनवृद्धि एक वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से रोकने का लघु दंड दिया गया था. ऐसे में 23 नवंबर 2010 के शासन परिपत्र के प्रावधान लागू होंगे.
हाईकोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को निलंबन अवधि का पूरा 100 प्रतिशत वेतन दिया जाए. इस फैसले को विभागीय कार्रवाई और निलंबन अवधि के वेतन निर्धारण के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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