उज्‍जैन में मोहन भागवत ने बताई रिलीजन की असली पर‍िभाषा, धर्म को लेकर क्‍या कहा?

Ujjain News: भागवत ने कहा कि पाश्चात्य के लोगों के कारण हम धर्म को रिलीजन को धर्म कहने लगे. भागवत ने कहा कि रिलीजन, धर्म नहीं है. रिलीजन की गांठ मन से निकाल दीजिए.
Mohan Bhagwat's dialogue with the youth in Ujjain

उज्जैन में मोहन भागवत का युवा संवाद

Ujjain News: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में युवा धर्म संसद का विधिविधान के साथ उद्घाटन किया. इस दौरान कार्यक्रम में धर्म, राष्ट्र और समाज से जुड़े प्रश्‍नों पर संघ प्रमुख ने युवाओं से संवाद भी किया. देशभर में अब तक 5 युवा धर्म संसद आयोजित हो चुकी है और उज्जैन में 6वीं आयोजित की गई है.

कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि पाश्चात्य के लोगों के कारण हम धर्म को रिलीजन धर्म कहने लगे. भागवत ने कहा कि रिलीजन, धर्म नहीं है. रिलीजन की गांठ मन से निकाल दीजिए, रिलीजन रिलिजियो से आया है, जिसे बांधना कहते हैं और धर्म बांधता नहीं मुक्त करता है.

संघ प्रमुख ने युवाओं से किया सवांद

कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मैं भाषण नहीं दूंगा, मैं संवाद करूंगा. उन्‍होंने कहा कि धर्म का विचार युवा करते हैं, ये बात आजकल सुनाई नहीं देती. धर्म की बात करे तो लोग कहते हैं बुढ़ापे की बात है. भागवत ने कहा कि धार्मिक ग्रंथ रिटायरमेंट होने के बाद पढ़ने के लिए नहीं है. धर्म अस्तित्व के प्रारंभ से अंत तक रहता है. उन्‍होंने कहा कि मनुष्य अहंकार में रहता है कि सब ओर मेरी सत्ता चलती है, लेकिन ऐसा नहीं है.

संघ प्रमुख ने आगे कहा कि धर्म को समझना है तो पुरानी मन में बैठी बातों से मुक्त होना पड़ेगा. सृष्टि के अस्तित्व से विलय तक धर्म रहेगा. उन्‍होंने कहा कि सभी सुखों का कारण धर्म है. जीवन में भौतिक सुख भी धर्म से प्राप्त होते हैं. धर्म का त्याग कभी मत करना.

कल स्‍वयं सेवकों को किया था संबोधित

संघ प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को उज्जैन पहुंचे थे. यहां उन्‍होंने महाकाल परिसर के अरविंद नगर में मोहन भागवत ने प्रांत, विभाग, महानगर, नगर और बस्ती के दायित्ववा स्‍वयं सेवकों को संबोधि‍त किया. एक घंटे चले कार्यक्रम में भागवत ने आरएसएस की अब तक की पूरी यात्रा और वर्तमान में संगठन की उपलब्धियों और आगे की भूमिका पर चर्चा की.

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