स्वच्छता और सैनिटेशन में मॉडल बनेंगे MP के शहर, PRAGATI-50 पहल में शामिल भोपाल, इंदौर और उज्जैन
भोपाल, इंदौर और उज्जैन प्रगति-50 में शामिल
MP News: देश के 50 शहरों में स्वच्छता और सैनिटेशन व्यवस्था को मॉडल बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने PRAGATI-50 (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) पहल शुरू की है. मध्य प्रदेश से इंदौर, भोपाल और उज्जैन को इस पहल में शामिल किया गया है. स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत इन शहरों में कचरा प्रबंधन, गंदे पानी के उपचार, सार्वजनिक स्वच्छता और नागरिक भागीदारी से जुड़ी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा.
इन आधार पर हुआ शहरों का चयन
पहल की शुरुआत 29 सितंबर को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी. केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री इसकी अध्यक्षता करेंगे. चयनित शहरों में सुधार की जरूरत वाली व्यवस्थाओं की निगरानी कर तय समयसीमा में काम पूरा कराने पर जोर रहेगा.
प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार शहरों का चयन केवल स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग के आधार पर नहीं किया गया है. इसमें जीएफसी स्टार रेटिंग, कचरा प्रबंधन, आबादी, भौगोलिक स्थिति और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता समेत कई बिंदुओं को आधार बनाया गया है.
तीनों शहरों में क्या-क्या होगा?
इंदौर में मौजूदा कचरा संग्रहण, छंटाई और प्रसंस्करण व्यवस्था को PRAGATI-50 के तहत और मजबूत किया जाएगा. घरों से अलग-अलग कचरा संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान की पूरी चेन की क्षमता व प्रभावशीलता बढ़ाने पर फोकस रहेगा. कम्पोस्टिंग, उपयोगी सामग्री की छंटाई, बायोगैस और अन्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के साथ इस्तेमाल किए गए पानी के उपचार और दोबारा उपयोग की निगरानी भी की जाएगी.
उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए घाटों, सार्वजनिक शौचालयों और ठोस-तरल कचरा प्रबंधन को मजबूत किया जाएगा. श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सफाई, क्षिप्रा नदी की स्वच्छता और पानी के प्रबंधन पर विशेष ध्यान रहेगा. कचरा कम करने और उसके दोबारा उपयोग के लिए जीरो वेस्ट मॉडल पर काम किया जाएगा.
ये भी पढ़ें: UNESCO की टेंटेटिव लिस्ट में एमपी के 4 ऐतिहासिक स्थल शामिल, जानें क्यों हैं ये जगह इतनी खास
वहीं भोपाल में 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को ध्यान में रखते हुए कचरा प्रबंधन, इस्तेमाल किए गए पानी के पुनः उपयोग, सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और स्मार्ट वेस्ट मैनेजमेंट पर काम किया जाएगा. निजी भागीदारी वाली परियोजनाओं को भी बढ़ावा देने की योजना है.