यह कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित उनके निजी आवास पर किया गया. इस आयोजन में 110 से ज्यादा प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. जिनमें योग साधक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि शामिल थे.
ट्रैक्टर ट्रॉली सवार दो भाई करन (22) और सागर (18) राजस्थान से वापस लौट रहे थे. लेकिन तभी कोहन नदी पार करते समय दोनों ट्रैक्टर ट्रॉली समेत नदी में बह गए. दोनों भाई राजस्थान नें लहसुन बेचने गए थे.
आजादी के 78 साल बाद भी गांव में एक मुक्ति धाम नहीं बन पाया है. जिसके कारण बारिश में अगर किसी की मौत हो जाए तो ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए परेशान होते हैं.
मोहम्मद जवाद हुसैनी ने कहा है कि भारत को इजरायल की खुलेआम निंदा करनी चाहिए. भारत जैसे बड़े और शांति प्रिय देश को इजरायल की आलोचना करके उस पर दबाव बनाना चाहिए.
डॉ मोहन यादव ने कहा, 'जिनके घर गाय है वह गोपाल है, जिनके गाय है वह गाय वाला है. धरती पर जहां गोपाल और गाय है वही स्वर्ग है. जहां मां की सीमा समाप्त हो जाती है, वहां गौ माता की सीमा शुरू होती है. घर की पहली रोटी गौ माता को देते हैं.'
अखिलेश यादव ने ट्वीट करके लिखा, 'जिन्होंने योजना आयोग खत्म कर दिया उनके राज में बिना योजना के यही हाल होगा. शुक्र तो ये मनाइए कि बिल्डिंग को चीरते हुए पुल नहीं बना. भाजपाई भ्रष्टाचार को देखकर, कहीं ईमानदारी इसी पुल से कूदकर… और कुछ नहीं कहना है.'
ईरान ने अपना एयरस्पेस फिर से खोल दिया है. ईरान अपने ही विमानों से एक हजार भारतीयों को दिल्ली वापस भेजेगा. भारतीयों को लाने के लिए ईरान के मशहद शहर से विमान की व्यवस्था की गई है.
उफनते नाले के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली सवार नाला पार करने लगे इस दौरान बैलेंस बिगड़ने से ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई. ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सभी लोग बहने लगे. गनीमत रही कि घटना के दौरान कई लोग पास में ही खड़े थे और उन्होंने फुर्ती दिखाते हुए रस्सी डालकर सभी का रेस्क्यू किया.
ईरान-इजरायल युद्ध को लेकर मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा, 'ये बेहद अफसोस जनक है कि हम जुल्म करने वाले इजरायल का साथ दे रहे हैं. भारत अमेरिका के साथ है लेकिन ईरान के साथ नहीं है. इजरायल और अमेरिका आतंकवादी हैं. इजरायल ने फिलस्तीन में 65000 से ज्यादा निर्दोष लोगों की हत्या कर दी.'
4 लेन में बने इस एक्सप्रेस-वे को बनने में लगभग साढ़े 5 साल का समय लग गया. 10 फरवरी 2020 को एक्सप्रेस-वे का काम शुरू हुआ था. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से लखनऊ, गोरखपुर, संतकबीर नगर, आजमगढ़, बस्ती और सिद्धार्थनगर के बीच की दूरी कम हो जाएगी.