Chhattisgarh School Administration News: शिक्षा विभाग के मुताबिक, प्रिंसिपल की सैलरी 80 हजार रुपए है. चार वरिष्ठ शिक्षकों की सैलरी 1-1 लाख है. वहीं 3 अतिथि शिक्षकों का मानदेय 90 हजार प्रतिमाह है. इनकी सैलरी के लिए आहरण-संवितरण अधिकारी हर महीने सरकारी खजाने ले करीब 6 लाख रुपए निकाल रहे हैं.
Ayushman Yojana Chhattisgarh: जांच में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा, बस्तर, कबीरधाम, कोंडागांव और कोरबा जिले के अस्पताल शामिल हैं. जांच के दौरान अस्पतालों से इलाज संबंधी दस्तावेज जब्त किए गए थे
Balod Majdoor Bandhak News: तामिलनाडु पहुंचने के बाद मजदूरों को एक जगह बंधक बना लिया गया. वहीं हैरानी की बात तब सामने आई जब, परिजनों को फोन पर धमकी दी गई कि अगर उन्होंने पैसे नहीं भेजे तो मजदूरों को नहीं छोड़ा जाएगा.
RPF 42nd Foundation Day Raipur: कार्यक्रम में एक विशेष सम्मान भी दिया जाएगा. साल 2024 में एक रेल यात्री की जान बचाने वाले आरपीएफ जवान को जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया जाएगा. जवान ने अपनी जान की परवाह किए बिना यात्री की जान बचाई थी.
India vs Zimbabwe Women T20 Raipur: आज से टिकटों की बिक्री शुरू हो रही है. इस बार टिकट पूरी तरह ऑनलाइन बेचे जाएंगे. स्टेडियम के गेट पर टिकट काउंटर की भीड़ से बचने के लिए यह फैसला लिया गया है.
Ganna Bonus Chhattisgarh: इस फैसले का सीधा फायदा प्रदेश के चारों सहकारी शक्कर कारखानों से जुड़े 31,022 किसानों को मिलेगा. पेराई सत्र 2025-26 के लिए कुल 51.09 करोड़ रुपये की बोनस राशि किसानों के खाते में जाएगी.
Durg News: स्क्रैप के सोर्स और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है. फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही साफ होगा कि बरामद रेल पटरियां बीएसपी से किस तरह गोदाम तक पहुंचीं और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं.
Chhattisgarh Teacher Attendance: स्कूल शिक्षा संचालनालय ऐसे शिक्षकों की सूची सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भेज रहा है, जिनकी ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं हुई है. ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगाने वाले शिक्षकों का वेतन रोकने की तैयारी है.
Sai Cabinet Baithak: उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कैबिनेट में पूर्व अग्निवीरों के लिए गृह विभाग में आरक्षक के 36 रिक्त पदों पर भर्ती का निर्णय लिया गया है. साथ ही आदिम जाति विभाग का नाम बदलकर जनजाति कार्य विभाग करने का फैसला भी लिया गया है.
Balrampur Palayan: मजदूरों ने बताया कि खेती बाड़ी का काम लगभग समाप्त हो चुका है. इसके बाद गांव में ऐसा कोई पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है, जिससे परिवार का खर्च आसानी से चल सके. इसी मजबूरी में उन्हें अंबिकापुर का रुख करना पड़ा है.