Waqf Amendment Bill: गुरुवार को लोकसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक-2024 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के कार्यकाल को आगे बढ़ने की मंजूरी दे दी है. यह अगले साल बजट सत्र के आखिरी दिन तक के लिए बढ़ाया गया है.
Bangladesh Violence: गुरुवार, 28 नवंबर को ढाका हाई कोर्ट ने बांग्लादेश में इस्कॉन की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के सू मोटो से आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा कि इस्कॉन की गतिविधियों के खिलाफ हमने जरूरी कदम उठाए हैं.
Parliament Winter Session: गुरुवार को नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी पहली बार लोकसभा पहुंचीं. उन्होंने लोकसभा में सांसद पद की शपथ ली.
Maharashtra CM: महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के नाम अभी तक सस्पेंस जारी है. महायुति से सीएम कौन होगा यह अभी तक क्लियर नहीं हुआ है. आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ महायुति के नेताओं की मीटिंग दिल्ली में होनी है.
इससे पहले मंगलवार की सुनवाई के दौरान हिंदू सेना ने एक किताब सबूत को तौर पर पेश की थी. इस किताब में ये दावा किया गया है कि दरगाह की जगह पहले मंदिर था.
अखिलेश यादव ने यूपी में कांग्रेस के साथ अपने गठबंधन को लेकर भी विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा, "कांग्रेस को धीरे-धीरे यह समझ में आएगा कि समाजवादी पार्टी की रणनीति ही बीजेपी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है."
बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने भी मंत्री की इस मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसा बहुत सा कंटेंट मौजूद है जो भारतीय संस्कृति के मूल्यों से मेल नहीं खाता.
CG News: बिना दवा के कैंसर के इलाज का दावा करने वाले पूर्व क्रिकेटर और पंजाब कांग्रेस लीडर नवजोत सिंह सिद्धू बुरी तरह फंस गए हैं. इस दावे को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने उनके खिलाफ लीगल नोटिस जारी किया है. इसके जरिए उनसे डॉक्यूमेंट पेश करने के लिए कहा है नहीं तो उन्हें 850 करोड़ रुपए देने पड़ेंगे.
इस दौरान शिंदे ने भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में अपनी सहमति भी जाहिर की, और कहा कि वह भाजपा के नेतृत्व में काम करने को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं. यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में अहम मोड़ पर आया है, क्योंकि अब तक कई राजनीतिक दलों और नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर बयानबाजी और मुकाबला चल रहा था.
ललित मोदी ने कहा कि जब उन्होंने कोच्चि IPL टीम के साझेदारों के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें यह समझ में आया कि यह टीम वित्तीय रूप से सही नहीं थी. इसके बावजूद सुनंद पुष्कर को बिना किसी योगदान के बड़ा हिस्सा दे दिया गया.