बस्तर के बाजार में ओडिशा से चोरी-छिपे पहुंच रही प्रतिबंधित थाई मांगुर
जगदलपुर. बस्तर के बाजारों में प्रतिबंधित थाई मांगुर (Thai Mangur fish) की चोरी-छिपे बिक्री की शिकायतों ने मत्स्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट क्षेत्र से बोरिगुमा के रास्ते प्रतिबंधित मछली को सीमावर्ती इलाकों से बस्तर तक पहुंचाया जा रहा है. विभाग की चेतावनी के बावजूद कुछ कारोबारी इसे बाजार में बेच रहे हैं. ऐसे में सीमावर्ती मार्गों और स्थानीय मछली बाजारों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है.
मत्स्य विभाग के अनुसार एक्सोटिक प्रजाति की मांगुर मछली के पालन, परिवहन, भंडारण, विक्रय और विपणन पर रोक है. थाई मांगुर को आक्रामक और मांसाहारी प्रजाति माना जाता है. इसके जलस्रोतों में पहुंचने पर देशी मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. यही वजह है कि इसके कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया है.
देशी मछलियों के लिए खतरा
थाई मांगुर छोटी मछलियों और अन्य जलीय जीवों का शिकार करती है. यदि यह प्राकृतिक जलस्रोतों में पहुंच जाए तो भोजन और आवास के लिए देशी प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है. इससे स्थानीय जलीय जैव विविधता प्रभावित होने की आशंका रहती है. विभाग इसी खतरे को देखते हुए इसके पालन और कारोबार पर कार्रवाई करता है.
सीमावर्ती रास्तों पर निगरानी की जरूरत
ओडिशा से बस्तर तक थाई मांगुर की कथित सप्लाई की जानकारी के बाद सीमावर्ती रास्तों पर जांच बढ़ाने की जरूरत है. विभाग पूर्व में भी मछली विक्रेताओं और कारोबारियों को प्रतिबंधित प्रजातियों की बिक्री नहीं करने की हिदायत दे चुका है. इसके बावजूद यदि चोरी-छिपे कारोबार जारी है तो बाजारों में नियमित जांच के साथ सीमावर्ती मार्गों पर भी निगरानी जरूरी होगी.
25 हजार तक जुर्माने का प्रावधान
प्रतिबंधित थाई मांगुर मिलने पर छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम, 1948 की धारा 5 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है. उल्लंघन करने पर 25 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा प्रतिबंधित मत्स्य बीज और भंडार को नष्ट करने का भी प्रावधान है. विभाग द्वारा ऐसे मामलों में मछली के स्रोत, परिवहन और बिक्री से जुड़े लोगों की जांच की जा सकती है.
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