बस्‍तर दशहरा में शामिल होंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने किया आमंत्रित

CG News: केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आत्मीय भेंट कर उन्‍हें इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा एवं जनजातीय विरासत के प्रतीक बस्‍तर दशहरा में सम्मलित होने के लिए आमंत्रित किया.
Ministers Tokhan Sahu and Rajesh Agrawal met the President.

राष्ट्रपति से मिले मंत्री तोखन साहू और मंत्री राजेश अग्रवाल

Bastar Dussehra 2026: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में मनाया जाने वाला विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा करीब 75 दिनों तक चलने वाला अनोखा आदिवासी पर्व है. इस मौके पर शामिल होने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आत्मीय भेंट कर उन्‍हें इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा एवं जनजातीय विरासत के प्रतीक दशहरा पर्व में सम्मलित होने के लिए आमंत्रित किया.

सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से आत्मीय भेंट कर उन्हें छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा एवं जनजातीय विरासत के प्रतीक विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा में पधारने हेतु सादर आमंत्रित किया.

सदियों पुरानी आस्था का उत्सव है बस्तर दशहरा

राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा सदियों पुरानी आस्था, लोकपरंपराओं, जनजातीय संस्कृति और जनसहभागिता का अद्वितीय उत्सव है. यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और जनजातीय विरासत का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में सम्मिलित होने का प्रयास करने की बात कही. राष्ट्रपति की इस प्रतिक्रिया से बस्तर दशहरा में उनके शामिल होने की उम्मीद जगी है.

मुलाकात में ये लोग भी रहे मौजूद

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, बस्तर सांसद महेश कश्यप एवं संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन भी उपस्थित रहे. राजेश अग्रवाल ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति से हुई यह गरिमामयी भेंट अत्यंत स्मरणीय रही. उन्होंने राष्ट्रपति को बस्तर दशहरा में शामिल होने के लिए आमंत्रित किए जाने को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया.

75 दिनों तक चलने वाला अनूठा आदिवासी उत्सव

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में मनाया जाने वाला बस्तर दशहरा करीब 75 दिनों तक चलने वाला अनोखा आदिवासी पर्व है. इसकी शुरुआत सावन महीने की हरियाली अमावस्या से होती है और अश्विन मास तक अलग-अलग परंपराओं के साथ यह उत्सव चलता है.

खास बात यह है कि यहां रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता, क्योंकि बस्तर दशहरा भगवान राम की विजय के बजाय स्थानीय आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा और आदिवासी परंपराओं को समर्पित है. इतिहास के अनुसार, इस उत्सव की परंपरा 15वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा महाराजा पुरुषोत्तम देव के समय शुरू हुई थी.

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