खाट पर सिस्टम! कांकेर में मरीज को खाट पर लादकर तय किया 19 किलोमीटर का सफर, Video वायरल
मरीज को खाट पर लादकर ले जाते लोग
CG News: छत्तीसगढ़ के कांकेर से स्वास्थ्य व्यवस्था के बदहाली की तस्वीर सामने आई है. जहां पखांजूर के अंदरूनी गांव में एक लकवाग्रस्त युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली और मजबूरन 20 ग्रामीणों ने उसे खटिया में लादकर 19 किलोमीटर पैदल सफर तय किया. यह तस्वीरें सिस्टम पर सीधा तमाचा हैं. जहां 21वीं सदी में भी एक लकवाग्रस्त युवक को एंबुलेंस नहीं, बल्कि खटिया नसीब होती है.
मरीज को खाट पर लादकर किया 19 किलोमीटर का सफर
ये मामला नारायणपुर और कांकेर जिले की सीमा से लगे बीनागुंडा गांव का है. जहां आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क दोनों नदारद है. तीन दिन तक एंबुलेंस नहीं मिली और आखिरकार 20 ग्रामीणों ने 19 किलोमीटर तक मरीज को कंधे पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया.
वीडियो में दिख रहा खटिया में बंधा ये युवक बिनागुंडा गांव का रहने वाला मर्रो पददा है. जिसे तीन दिन पहले लकवा मार गया. परिवार सुबह 7 बजे से 108 एंबुलेंस को फोन करता रहा, लेकिन सिस्टम सोता रहा. जब कोई मदद नहीं मिली, तो गांव के लोग खुद भगवान बन गए. 20 लोगों ने खटिया उठाई और 19 किलोमीटर लंबा, जानलेवा सफर शुरू किया. पहाड़, पथरीले रास्ते और टूटती सांसों के बीच हर कदम एक जंग थी. करीब 4 घंटे बाद जब यह काफिला छोटेबेठिया पहुंचा. तब जाकर कहीं सिस्टम की नींद टूटी. छोटेबेठिया BSF कैंप से मदद मिली और फिर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया.
सिर्फ कागजों में दौड़ रही एंबुलेंस
हैरानी की बात ये है कि इस इलाके में पिछले 108 एंबुलेंस सेवा अक्सर ठप रहती है. गांव तक सड़क नहीं..स्वास्थ्य सुविधा नहीं…और जिम्मेदारों को कोई फर्क नहीं. बीमार सिर्फ मरीज नहीं बल्कि पूरा सिस्टम है. सवाल ये है क्या अंदरूनी गांवों में जिंदगी की कोई कीमत नहीं है? क्या सरकार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? और आखिर कब तक मरीज खटिया पर और सिस्टम कागजों पर चलता रहेगा?