बस्तर में तबादला आदेशों की अनदेखी? महीने बाद भी नई पदस्थापना पर नहीं पहुंचे पुलिस अधिकारी
रायपुर. बस्तर संभाग में पुलिस अधिकारियों के तबादला आदेशों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. आदेश जारी होने के महीने बाद भी कुछ अधिकारियों के नई पदस्थापना पर ज्वाइन नहीं करने और कुछ के वर्तमान पदस्थापना स्थल से रिलीव नहीं होने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मंत्रालय से जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है?
मामले में एक प्रशिक्षु IPS अधिकारी का नाम सामने आ रहा है, जिनका ASP ऑपरेशंस के पद पर नारायणपुर तबादला किए जाने की जानकारी है. बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी ने अब तक नई पदस्थापना पर ज्वाइन नहीं किया है. हालांकि, उनकी ज्वाइनिंग में देरी की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं है.
इसी तरह बीजापुर में पदस्थ ASP रविंद्र मीणा को भी मुख्यालय के लिए अब तक रिलीव नहीं किए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा, SI स्तर के कुछ अधिकारियों को भी बस्तर से रिलीव नहीं किए जाने की जानकारी है. यदि इन मामलों में तबादला आदेश जारी होने के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था और आदेशों के अनुपालन से जुड़ा गंभीर सवाल है. इसके अलावा विमल कुमार पाठक के भी ट्रांसफर के बाद ज्वाईनिंग न किए जाने की सूचना है. ये खबर भी जरूर पढ़ेंः CG News: ASI पर UPI से वसूली का आरोप, पहले सस्पेंड फिर बहाली…कार्रवाई की फाइल कहां अटकी?
आखिर आदेशों के पालन में देरी क्यों?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित अधिकारी नई पदस्थापना पर ज्वाइन क्यों नहीं कर पा रहे हैं. क्या वर्तमान पदस्थापना स्थल से उन्हें रिलीव करने में देरी हो रही है, या फिर ज्वाइनिंग नहीं होने के पीछे कोई दूसरी प्रशासनिक वजह है? इन सवालों का जवाब पुलिस विभाग और शासन के संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए.
एक जिले में ASP ऑप्स का पद रिक्त रहने की स्थिति भी प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऑप्स का पद पुलिसिंग के समन्वय और विभागीय कामकाज में अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में लंबे समय तक पद रिक्त रहने या पदस्थापना संबंधी आदेशों के क्रियान्वयन में देरी होने पर स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है.
पर्दे के पीछे क्या है वजह?
अधिकारियों की रिलीविंग और ज्वाइनिंग में देरी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो सकती हैं. कुछ लोग इसके पीछे स्थानीय स्तर पर प्रभाव, विभागीय समीकरण या कथित अनियमितताओं से जुड़े हितों की आशंका जता सकते हैं. यदि किसी स्तर पर तबादला आदेशों के क्रियान्वयन को जानबूझकर रोका जा रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए. साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित अधिकारियों को रिलीव करने की जिम्मेदारी किस स्तर पर है और आदेशों के पालन में देरी के लिए कौन जवाबदेह है.
बड़ा सवाल: मंत्रालय के आदेश पर अमल कब?
बस्तर संभाग में सामने आए इन मामलों ने पुलिस विभाग की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. शासन से जारी तबादला आदेशों के बाद भी यदि अधिकारी लंबे समय तक नई जगह पर कार्यभार ग्रहण नहीं करते, तो इसकी वजह सार्वजनिक की जानी चाहिए.
अब निगाहें पुलिस मुख्यालय और शासन के गृह विभाग पर हैं. क्या इन मामलों में अधिकारियों की ज्वाइनिंग और रिलीविंग की स्थिति स्पष्ट की जाएगी? क्या देरी के कारणों की समीक्षा होगी? और यदि आदेशों के पालन में जानबूझकर बाधा डाली गई है, तो क्या जिम्मेदारी तय की जाएगी?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद भी नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कराने की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है, और मंत्रालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ये है उन अधिकारियों की ट्रांसफर लिस्ट जिसमें से कई अधिकारी न रिलीव हुए और न दी ज्वाईनिंग


