दीये घर में जलेंगे दिवाली कहीं और… कहा- जिम्मेदारी और कर्तव्य पहले

रायपुर. दीपावली खुशियों, रोशनी और अपनों के साथ वक्त बिताने का त्योहार है. इस दिन हर कोई अपने परिवार के बीच रहना चाहता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ख्वाहिश हर साल अधूरी रह जाती है.
Diwali Away From Home Commitments

रायपुर. दीपावली खुशियों, रोशनी और अपनों के साथ वक्त बिताने का त्योहार है. इस दिन हर कोई अपने परिवार के बीच रहना चाहता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ख्वाहिश हर साल अधूरी रह जाती है. किसी को नौकरी की जिम्मेदारियां घर आने से रोक रही हैं, तो किसी को छुट्टी नहीं मिलने की मजबूरी है. विदेशों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय भी ऐसे हैं, जो कई वर्षों से दीपावली पर अपने घर नहीं लौट सके हैं. ऐसे परिवारों के घरों में इस बार भी दीये जलेंगे, मिठाइयां बनेंगी और पूजा होगी, लेकिन अपनों की कमी त्योहार की खुशियों के बीच जरूर महसूस होगी.

 शहर में दीपावली की तैयारियां जोरों पर हैं. बाजारों में रौनक है और घरों की सजावट से लेकर खरीदारी तक का दौर चल रहा है. वहीं, कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो त्योहार की तैयारियों के बीच अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रहे थे. किसी का बेटा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में नौकरी कर रहा है, तो किसी की बेटी अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया या जर्मनी में रह रही है. छुट्टी नहीं मिलने, काम के दबाव और यात्रा की परेशानियों के चलते वे इस बार भी घर नहीं पहुंच पाएंगे.

वीडियो कॉल बनेगी अपनों से मिलने का जरिया

तकनीक ने भले ही दूरियों को कुछ कम कर दिया है, लेकिन अपनों के साथ बैठकर त्योहार मनाने का एहसास वीडियो कॉल से नहीं मिल सकता. ऐसे में कई परिवारों ने दीपावली के दिन वीडियो कॉल के जरिए एक-दूसरे से जुड़ने की तैयारी की है. विदेशों में रहने वाले बच्चे ऑनलाइन पूजा में शामिल होंगे और अपने माता-पिता को शुभकामनाएं देंगे. वहीं, कुछ परिवार बच्चों की पसंद के पकवान बनाकर उनकी यादों को ताजा करेंगे. फोन की घंटी और वीडियो कॉल ही इस बार दूर बैठे अपनों से मिलने का सहारा बनेगी.

बच्चों की याद में मनेगा त्योहार

शहर के कई ऐसे परिवार हैं, जिनके बच्चे पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में विदेशों में बस गए हैं. कुछ परिवारों के बच्चे कई वर्षों से दीपावली पर घर नहीं आ सके हैं. समय के अंतर और लंबी दूरी के कारण एक साथ त्योहार मनाना भी आसान नहीं होता. ऐसे में माता-पिता के लिए दीपावली की खुशियों के बीच बच्चों की याद सबसे बड़ी कमी बन जाती है. घर में रोशनी तो होगी, पकवान भी बनेंगे, लेकिन दरवाजे पर बच्चों के आने की आहट का इंतजार इस बार भी बना रहेगा.

लोगों की खुशियों की जवाबदारी, हमारा जवाबदारी

मूलतः रायगढ़ की रहने वाली वर्तमान में महासमुंद में पदस्थ डीएसपी ललिता मेहर (Lalita Mehar) कहती है कि लोगों की खुशियों की हमारी जवाबदारी है, इसलिए त्योहारों में घर से ज्यादा कभी संभव नहीं हो पाता है. वे फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से हर बार मां-पिता जी और ससुराल में फोन से ही घर की पूजा में शामिल होकर अपने कर्तव्य निभाती है.

यात्रियों को सकुशल घर भेजना पहली प्राथमिकता

राजनांदगांव आरपीएफ इंस्पेक्टर तरूणा साहू (Taruna Sahu) कहती है कि त्योहारों में यात्रियों को सकुशल भेजना हमारी पहली प्राथमिकता होती है, इसलिए बतौर इंस्पेक्टर मैं अपनी जिम्मेदारी निभाती हूं. वे कहती है कि ड्यूटी में आने के बाद उन्हें याद नहीं है कि वे त्यौहारों में कभी घर गई हों. हालांकि वे ये भी कहती है कि राजनांदगांव में ही उनके पति एमन साहू (इंस्पेक्टर) की भी पोस्टिंग है इसलिए पिछले एक वर्षों से वे साथ में त्योहार मना रहे है. 

दोस्तों के साथ त्योहार मनाते है नसीम

मूलतः महासमुंद के रहने वाले नसीम खान कहते है कि अक्सर उनके साथ ऐसा होता है कि सभी ये सोचते है कि वे मुस्लिम हैं तो भला त्योहार कैसे मनाएगा ? वे कहते है कि मैं अपने सभी दोस्तों के साथ उनके सभी त्योहार मनाता हूं, दोस्तों के घर बने सभी पकवानों को साथ में खाने का अपना एक अलग ही आनंद है. लेकिन पिछले दो वर्षों से वे अपने दोस्तों के साथ दीपावली मनाने घर महासमुंद नहीं जा पाया हूं.

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