अभिनेत्री रागिनी चौबे सुनाएंगी धनतेरस से भाई दूज तक के त्योहारों की रोचक कहानियां, 6 से 11 नवंबर तक होगा विशेष प्रसारण
मुंबई.दीपावली सिर्फ रोशनी, मिठाइयों और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी कई रोचक कहानियों का भी प्रतीक है. इन्हीं कहानियों और त्योहारों के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से शेमारू टीवी इस दीपावली एक खास सीरीज़ ‘शेमारू दीपोत्सव- हर उत्सव की कहानी’ लेकर आ रहा है.
चार विशेष कड़ियों वाली इस सीरीज़ में दर्शकों को धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज से जुड़ी पौराणिक कथाओं और परंपराओं के बारे में जानने का अवसर मिलेगा. सीरीज़ में अभिनेत्री रागिनी चौबे इन त्योहारों के पीछे छिपी कहानियों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करेंगी. रागिनी चौबे को लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक ‘देवों के देव महादेव’ में देवी लक्ष्मी की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है.
सीरीज के माध्यम से बताया जाएगा कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है और यम दीपदान का क्या महत्व है. वहीं, दीपावली पर भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी और लक्ष्मी-गणेश पूजन से जुड़ी मान्यताओं को भी दर्शाया जाएगा. गोवर्धन पूजा की कथा के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के उस संदेश को सामने लाया जाएगा, जिसमें आस्था के सामने अहंकार का कोई स्थान नहीं है. इसके अलावा, भाई दूज पर यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी पौराणिक कथा भी सुनाई जाएगी.
इस पहल का उद्देश्य केवल त्योहारों से जुड़ी धार्मिक कथाओं को प्रस्तुत करना ही नहीं, बल्कि परिवारों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से दोबारा जोड़ना भी है. आज के दौर में जब परिवारों के साथ बैठकर कहानियां सुनने-सुनाने की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है, ऐसे में यह सीरीज़ बच्चों और बड़ों को एक साथ बैठकर भारतीय संस्कृति और संस्कारों को समझने का अवसर देगी.
क्या कहा रागिनी चौबे ने ?
सीरीज को लेकर अभिनेत्री रागिनी चौबे ने कहा कि देवी लक्ष्मी का किरदार निभाने के बाद से ही इन कहानियों से मेरा खास जुड़ाव रहा है. ‘शेमारू दीपोत्सव’ के जरिए मेरी कोशिश है कि परिवार के लोग फिर से साथ बैठकर कहानियां सुनने और सुनाने की पुरानी परंपरा का आनंद लें. इससे बच्चों के मन में सवाल उठेंगे और माता-पिता व दादा-दादी को भी उन कहानियों को सुनाने का मौका मिलेगा, जो उन्होंने कई सालों से किसी को नहीं सुनाई हैं. इन कहानियों को जानने से हम अपनी परंपराओं और संस्कारों से जुड़े रहते हैं. ये हमें प्यार, आस्था, दूसरों के प्रति आभार और परिवार की अहमियत भी समझाती हैं. आने वाली पीढ़ी को हम सिर्फ अपनी परंपराएँ ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी अच्छी सीख और भावनाएँ भी दे सकते हैं.”


