‘संसद में दो तिहाई बहुमत पर नजर….’, क्या बीजेपी के करीब आ रही DMK, स्टालिन को NDA में लाने पर चल रही बात
एमके स्टालिन और पीएम मोदी
BJP DMK Alliance Speculation: देश की राजनीति में इन दिनों तमिलनाडु की चर्चा जोरों पर हैं. इन चर्चाओं के पीछे की पहली वजह तो विजय सरकार है, जो लगातार ताबड़तोड़ फैसले ले रही है. दूसरी चर्चा एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके को लेकर चर्चा तेज है. ऐसा कहा जा रहा है कि डीएमके भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकती है. हालांकि इसको लेकर अब तक किसी भी पार्टी की तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया है. लेकिन, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है.
यह चर्चा ऐसे समय में उठी है जब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार संसद में कई बड़े संवैधानिक और राजनीतिक फैसलों के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत महसूस कर रही है. इसी को वजह माना जा रहा है कि डीएमके अगर साथ आती है तो मोदी सरकार को मदद मिलेगी. हालांकि स्टालिन हमेशा से ही मोदी सरकार का खुलकर विरोध करते हैं. यही वजह है कि इस राजनीतिक घटनाक्रम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
क्यों एनडीए में शामिल कराने की हो रही तैयारी
हाल के महीनों में महिलाओं को संसद और विधानसभा में आरक्षण लागू करने तथा परिसीमन (Delimitation) से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर सरकार को जिस तरह के समर्थन की उम्मीद थी वह नहीं मिला है. लोकसभा में एनडीए जरूरी आंकड़े से पीछे रह गया था. इसके बाद से राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि बीजेपी अब दक्षिण भारत की क्षेत्रीय पार्टियों के साथ नए रिश्ते बनाने की कोशिश कर सकती है.
इसी कड़ी में डीएमके का नाम सामने आने लगा है. हालांकि राजनीतिक तौर पर डीएमके लंबे समय से बीजेपी की वैचारिक विरोधी रही है. स्टालिन ने परिसीमन और दक्षिण भारत की सीटों के मुद्दे पर केंद्र सरकार का खुलकर विरोध किया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि नए परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है.
क्यों मिल रही इस तरह की अटकलों को हवा?
तमिलनाडु में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक हालात ने अटकलों को हवा दी है. चुनाव में डीएमके को बड़ा झटका लगा और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई. इसके बाद स्टालिन ने हार की समीक्षा के लिए कमेटी बनाई और संगठन के भीतर मंथन शुरू हुआ.
क्या है बीजेपी का मास्टर प्लान?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीजेपी की नजर सिर्फ तमिलनाडु पर नहीं, बल्कि राज्यसभा और भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति पर भी है. दक्षिण भारत में मजबूत सहयोगी मिलने से बीजेपी को संसद में बड़े विधेयक पास कराने में आसानी हो सकती है. इसके साथ ही विपक्षी INDIA गठबंधन को भी कमजोर किया जा सकता है. यही वजह है कि एनडीए इस रणनीति पर काम कर रही है.
हालांकि अभी तक डीएमके या बीजेपी की ओर से किसी औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है. डीएमके नेताओं का सार्वजनिक रुख अब भी बीजेपी विरोधी ही दिखाई देता है. वहीं बीजेपी के लिए भी तमिलनाडु में एआईएडीएमके पहले से सहयोगी दल है, इसलिए डीएमके को साथ लाने की राह आसान नहीं मानी जा रही है.
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