‘आपकी बात से कई लोग असहमत हो सकते हैं…’, दिल्ली HC ने अनिरुद्धाचार्य से कहा, ‘मंगल ग्रह पर भी विवाद है…’

Kathavachak Aniruddhacharya: कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य से कहा कि आप हमेशा एक दर्शन का पक्ष रखते हैं. इससे हमेशा कोई सहमत होगा और कोई नहीं होगा. जो आपसे सहमत नहीं है, उसे आपकी बात पर असहमति जताने का अधिकार है.
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य से की बड़ी बात

Kathavachak Aniruddhacharya: दिल्ली हाई कोर्ट में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने व्यक्तिगत अधिकारों के संरक्षण के लिए न्यायालय को आदेश देने के लिए कहा है. उनकी ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील ने कहा कि मुझे सट्टेबाजी और गेमिंग साइट्स में दिखाया जा रहा है. मेरी सामग्रियों को अलग-अलग चैनलों पर प्रकाशित किया जा रहा है. इनमें से कई सामग्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी हुई है. इन कार्रवाई की जानी चाहिए.

कोर्ट ने कथावाचक से क्या कहा?

कोर्ट ने अनिरुद्धाचार्य से कहा कि आप हमेशा एक दर्शन का पक्ष रखते हैं. इससे हमेशा कोई सहमत होगा और कोई नहीं होगा. जो आपसे सहमत नहीं है, उसे आपकी बात पर असहमति जताने का अधिकार है. आदिगुरु शंकराचार्य ने कभी मानहानि का मुकदमा नहीं किया. वे वाद-विवाद करते थे और इसके माध्यम से ही लोगों को गलत साबित करते थे. जब तक मानहानि करने वाला और अपमानजनक ना हो, तब तक ये मान्य नहीं है. अदालत ने भी कहा कि विवादित सामग्री मंगल ग्रह पर भी है और शायद जूपिटर पर भी.

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली उच्च न्यायालय में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने याचिका दायर करके कहा कि इंटरनेट पर उनकी छवि को खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ सोशल मीडिया यूट्यूब लिंक, इंस्टाग्राम समेत कई पोस्ट दिखाए. इनसे उनको गलत तरीके से पेश किया गया. इसके साथ ही उन्होंने इन लिंक्स को अलग-अलग प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की.

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आलोचना और मानहानि में अंतर बताया

न्यायालय में मामले की सुनवाई करते हुए आलोचना और मानहानि में अंतर बताया. असहमति जताना और तीखी आलोचना करना मानहानि के अंतर्गत नहीं आता है. जब तक बयान अपमानजनक और प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने वाले ना हों. कोर्ट ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य को अंतरिम संरक्षण को दे दिया है. इसके साथ ही कहा कि सार्वजनिक जीवन में आलोचना और असहमति के प्रति सहिष्णु होना चाहिए.

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