अल्पसंख्यक मुद्दे पर भिड़े ओवैसी और किरेन रिजिजू , मुस्लिम-पारसी तुलना पर छिड़ी सियासी बहस

Muslim Population Parsi Community: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों को लेकर असदुद्दीन ओवैसी और किरेन रिजिजू के बीच जमकर बहस देखने को मिली है.
असदुद्दीन ओवैसी और किरेन रिजिजू

असदुद्दीन ओवैसी और किरेन रिजिजू

Minority Debate: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है. यह बहस अल्पसंख्यकों की मौजूदा स्थिति को लेकर हुई है.  मुस्लिम और पारसी समुदाय की जनसंख्या को लेकर हुई टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर निशाना साधा है.

अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है. जहां अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं.

इसी दौरान उन्होंने मुस्लिम और पारसी समुदाय की आबादी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में मुसलमानों की संख्या इतनी बड़ी है कि अगर उन्हें अलग देश माना जाए तो वह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन सकते हैं, जबकि पारसी समुदाय की आबादी बेहद कम है.  

ओवैसी ने किया बयान का पलटवार

इस बयान पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी  ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. ओवैसी ने कहा कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक हैं, इसलिए हर गैर-हिंदू समुदाय संविधान के हिसाब से अल्पसंख्यक माना जाएगा. उन्होंने रिजिजू पर मुसलमानों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया और संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला दिया.  

ओवैसी ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा कि 79.8 प्रतिशत और 14 प्रतिशत में कौन बड़ा है. उनका कहना था कि आबादी ज्यादा होने से किसी समुदाय का अल्पसंख्यक दर्जा खत्म नहीं हो जाता है.

इसके बाद किरेन रिजिजू ने भी पलटवार किया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को खुद को छोटा महसूस नहीं करना चाहिए. भारत में हर धर्म सुरक्षित है. रिजिजू ने यह भी कहा कि पारसी जैसे बेहद छोटे समुदाय भी देश में सम्मान और सुरक्षा के साथ रह रहे हैं.  

किन समुदायों को मिला अल्पसंख्यक का दर्जा

भारतीय संविधान अल्पसंख्यकों को मौलिक संरक्षण तो देता है, लेकिन इसमें अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है. मौजूदा समय में नेशनल लेवल पर 6  धार्मिक समुदाय मुस्लिम, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन को अल्पसंख्यक का दर्जा मिला है.

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