विधायकों के बाद 20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, भूपेंद्र यादव के घर सुवेंदु से मुलाकात के बाद NDA को समर्थन का ऐलान
अब फिर होगी बगावत
TMC MPs Revolt: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही टीएमसी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हर दिन पार्टी का कोई न कोई सीनियर नेता साथ छोड़ता जा रहा है. पहले ममता बनर्जी का साथ विधायकों ने छोड़ा तो वहीं अब सांसदों ने भी साथ छोड़ दिया है. सोमवार दोपहर 20 सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग की. इसके बाद तय किया गया कि वह सभी सांसद एनडीए को समर्थन देंगे. इसको लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को भी पत्र लिखा है.
लोकसभा में TMC के अभी 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं. मतलब साफ है कि दो तिहाई से ज्यादा सांसद एक साथ दूसरे दल को समर्थन कर रहे हैं तो दल बदल का कानून भी लागू नहीं होगा. मतलब किसी को भी दोबारा चुनाव में नहीं उतरना पड़ेगा.
एनडीए को समर्थन देंगे सांसद
बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर हुई इस बैठक में सुखेंदु शेखर रॉय भी मौजूद रहे. यही वजह है कि इस बात चर्चा तेज थी कि ये बागी सांसद अब या तो नया गुट बना सकते हैं या फिर किसी राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं. इन सांसदों से बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने भी मुलाकात की है. मुलाकात के कुछ समय बाद ही सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर दिया.
भूपेंद्र यादव की इस बैठक में काकोली घोष, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी शामिल हुए. ऐसा कहा जा रहा है कि बाकी के सांसद भी शामिल हुए. हालांकि उनके नाम सामने नहीं आए.
जल्द लोकसभा अध्यक्ष से कर सकते हैं मुलाकात
ममता और टीएमसी से नाराज ये सांसद जल्द ही लोकसभा स्पीकर को अपने फैसले की जानकारी देंगे. लेकिन स्पीकर अभी दिल्ली में मौजूद नहीं हैं, लोकसभा स्पीकर अभी चंडीगढ़ में हैं. यही वजह है कि सांसदों ने पत्र लिखकर लोकसभा अध्यक्ष को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है.
टीएमसी की टूट कितने गुटों में बटेगी
मतलब साफ है कि एक से दो दिन के भीतर यह तय हो जाएगा कि ममता बनर्जी ने जिस पार्टी को कांग्रेस से बगावत कर 28 साल पहले बनाया था, उसके कितने टुकड़े होंगे. कहा ये भी जा रहा है कि सांसद अपना अलग गुट बनाएंगे और विधायक अपना अलग गुट बनाएंगे. जिससे साफ है कि ममता के पास 28 साल बाद पार्टी के नाम पर कुछ नेता ही बचेंगे.
ये भी पढ़ें: सुखेंदु शेखर रॉय ने छोड़ा ममता का साथ, इंडिया ब्लॉक की मीटिंग से पहले TMC को फिर लगा झटका