’10 लाख मुआवजा…’, फाइनेंस कंपनी ने जबरन उठाई थी गाड़ी, अब SC ने दिया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट
Finance Company Faces Setback: अगर आप भी कोई चीज लोन पर लिए हैं या लेने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले पर संज्ञान लिया है, जिसने एक ट्रक लोन पर तो ले लिया, लेकिन उसकी किस्त नहीं चुका पाया. जिसकी वजह से चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया. पीड़ित ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी को साढ़े 4 लाख रुपए 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने और 10 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है. इसके साथ ही कंपनी से पीड़ित को 50,000 रुपए कोर्ट का खर्च भी देने को कहा है. जानें क्या है पूरा मामला?
जब कोई फाइनेंस कंपनी कुछ भी सामान लोन पर देती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि लोन नहीं चुकाने की हालत में जब चाहे तब उसे जब्त कर सकती है. इससे पहले कंपनी को नोटिस देनी होती है. बिना नोटिस के कर्ज की वसूली के लिए बल, धमकी, चोरी-छिपे कार्रवाई या मनमाना तरीका नहीं अपनाया जा सकता है. एक ऐसा ही मामला ट्रक के फाइनेंस से जुड़ा है, जिसे कंपनी ने जबरदस्ती जब्त कर लिया था, जिसके बाद पीड़ित ने सु्प्रीम कोर्ट का सहारा लिया और अब कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी को बड़ा झटका दिया है.
क्या है मामला?
पीड़ित हरि दत्ता शर्मा ने बताया कि टाटा SFC 407 ट्रक को चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी से लोन फाइनेंस कराया था. लोन नहीं देने की दशा में जब डिफॉल्ट हो गया तो अप्रैल 2023 में ट्रक को रात करीब 1 बजे कंपनी के कुछ लोगों ने स्टीयरिंग लॉक तोड़कर अपने कब्जे में ले लिया. इसकी नोटिस भी नहीं दी. इस मामले को लेकर जब हरि दत्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो उनके इस मामले को लेकर जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे ने सुनवाई की.
10 लाख मुआवजा, 50 हजार खर्च
इस दौरान कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि कंपनी पीड़ित को 10 लाख रुपए मुआवजा और 50 हजार रुपए मुकदमे का खर्च दे. इसके अलावा साढ़े 4 लाख रुपए 6 प्रतिशत की सालाना ब्याज के साथ वापस करे. यानी अब फाइनेंस कंपनी को कोर्ट के आदेशानुसार पैसे चुकाने ही पडेंगे.
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सबसे बड़ा सवाल, EMI नहीं भर पा रहें तो क्या करें?
अगर आप किसी कारणवश EMI नहीं भर पा रहे हैं, तो फाइनेंस कंपनी से संपर्क करें और बकाया, नोटिस और भुगतान की समयसीमा से जुड़े सभी दस्तावेजों को संभालकर रखें. अगर तय समय के बाद भी आपने लोन नहीं चुकाया. ऐसी स्थिति में भी कंपनी आपके साथ मनमाना व्यवहार नहीं कर सकती है. आपको कानूनी अधिकारों के तहत नोटिस देगी और इसके बाद फाइनेंस कंपनी बकाया राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू करेगी.