IAS Transfer UP: उत्तर प्रदेश में आधी रात को 40 IAS अधिकारियों के ट्रांसफर, एक साथ 15 जिले के बदले DM
यूपी में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी
IAS Transfer UP: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इन दिनों प्रशासनिक सर्जरी करने में लगी है. इसी कड़ी में सरकार ने रविवार देर रात बड़ा फेरबदल करते हुए 40 IAS अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए. इस लिस्ट में 12 महिला अधिकारी भी शामिल हैं. जबकि 15 जिलों के कलेक्टर भी बदले गए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि ने लंबे मंथन के बाद इस ट्रांसफर सूची को तैयार किया है. माना जा रहा है कि आने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.
यूपी की ट्रांसफर लिस्ट में सबसे ज्यादा चर्चा परिवहन विभाग में हुए बदलाव को लेकर है. परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को हटाकर माध्यमिक शिक्षा विभाग में सचिव बनाया गया है. उनकी जगह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे आशुतोष निरंजन को नई जिम्मेदारी दी गई है.
स्मार्ट मीटर विवाद पड़ा भारी?
ऊर्जा विभाग में भी बड़ा बदलाव हुआ है. उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार को हटा दिया गया है. उनकी जगह नितिश कुमार को नया एमडी बनाया गया है. स्मार्ट मीटर विवाद के बाद लगातार सवाल उठ रहे थे, ऐसे में यह फैसला अहम माना जा रहा है. एक दिन पहले ही सरकार ने स्मार्ट मीटर की अदला-बदली पर रोक लगाई थी.
कई जिलों में नए डीएम की तैनाती
उन्नाव के गौरांग राठी को झांसी, सुल्तानपुर के कुमार हर्ष को बुलंदशहर, शामली के अरविंद चौहान को सहारनपुर और अमरोहा की निधि गुप्ता वत्स को फतेहपुर भेजा गया है। वहीं सहारनपुर के मनीष बंसल को आगरा का जिलाधिकारी बनाया गया है.
इन अफसरों को पहली बार मिली जिले की कमान
सरकार ने कई अधिकारियों को पहली बार जिले की कमान भी सौंपी है. ब्रजेश कुमार को औरैया, आलोक यादव को शामली, अभिषेक गोयल को हमीरपुर, इंद्रजीत सिंह को सुल्तानपुर और अन्नपूर्णा गर्ग को श्रावस्ती का डीएम बनाया गया है. सरनजीत कौर ब्रोका को रायबरेली और नितिन गौड़ को अमरोहा भेजा गया है.
चुनाव से पहले बड़ी सर्जरी
लखीमपुर खीरी की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को पदोन्नति देकर देवीपाटन मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया है. आगरा के डीएम अरविंद मल्लप्पा बांगरी को मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है. राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फेरबदल को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले की रणनीतिक तैयारी माना जा रहा है. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार लंबे समय से एक ही जिले में तैनात अधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है.
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