‘बंगाल में वोटिंग से पहले बने सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट’, SC का आदेश, कोर्ट के दखल के बाद किसे मिलेगा वोट डालने का अधिकार?
बंगाल में जिनकी अपील मंजूर, वो दे सकेंगे वोट
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में पिछले लंबे समय से ममता बनर्जी लगातार चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रही थीं. उनका आरोप था कि जानबूझकर चुनाव आयोग ने राज्य से वोटों को काटा है. उनको वोट देने से रोका जा रहा है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने आदेश चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करें.
सुप्रीम कोर्ट ने सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करने का आदेश देते हुए कहा कि इस लिस्ट में उन लोगों को शामिल किया जाए. उन्होंने अपील की थी और बाद में उन अपीलों पर ट्रिब्यूनल कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों की अपील अभी भी पेंडिंग है. उनको वोट डालने का अधिकार नहीं होगा.
कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होने वाला है. कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन लोगों की संपत्ति पर ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल तक फैसला कर लेता है, उनके नाम सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट शामिल किए जाएं. ठीक इसी तरह दूसरे चरण में 27 अप्रैल तक जिन पत्तियों पर फैसला आ जाता है, उन्हें भी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट लिस्ट में शामिल किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कही ये बात
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से लाखों की संख्या में वोट डाल सकेंगे. जिनका मामला अभी बीच में अटका हुआ है. उन पर एक से दो दिनों तो किसी आपत्ति पर एक हफ्ते में फैसला आ सकता है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कर रही है.
CJI सूर्यकांत ने मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर सभी लोगों को वोट देने का आदेश दे दिया जाएगा. तो इससे स्थिति को संभालना मुश्किल हो जाएगा. इसलिए जिन लोगों को क्लीन चिट मिल जाएगी. उन्हें ही वोट डालने का अधिकार दिया जाएगा. र्ट ने कहा कि मतदान केवल संवैधानिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक अधिकार भी है.
ट्रिब्यूनल में कितने मामले अभी पेंडिंग
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 90 लाख से ज्यादा वोट कट हुए हैं. चुनाव आयोग की तरफ से अब तक फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं. ऐसे में लोगों को आपत्ति का मौका दिया गया था. बंगाल की 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.
इनमें से कुछ का फैसला आ चुका है तो बडी संख्या में अभी भी आपत्ति अनसुलझी हैं. बड़ी संख्या में वोटों के काटने को लेकर ममता सरकार ने विरोध प्रदर्शन भी किया था. इसके साथ ही उनकी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयुक्त से मुलाकात के लिए भी पहुंचा था. हालांकि उस दौरान भी विवाद हो गया था. अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद टीएमसी ने राहत की सांस ली है.
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