रायसेन: खेत में नहीं उगी फसल, फिर भी सरकार ने खरीद ली लाखों की मूंग, EOW की जांच में बड़ा खुलासा

Raisen: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मूंग की सरकारी खरीदी के दौरान बड़े घोटाले का मामला सामने आया है. यहां पर आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर बड़ी धोखाधड़ी की है.
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फाइल फोटो

Raisen: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मूंग की सरकारी खरीदी के दौरान बड़े घोटाले का मामला सामने आया है. इस मामले में खेत तो किसान का था लेकिन फर्जी रजिस्ट्रेशन कराकर फसल किसी और की बिक रही थी. आरोपियों पर बाजार से बेहद सस्ती कीमत पर खरीदी गई मूंग को समर्थन मूल्य पर सरकार को बेचकर लाखों रुपये का अनुचित लाभ कमाने का आरोप है. आइए जानते है क्या है पूरा मामला.

EOW की कार्रवाई में सामने आई हकीकत

भोपाल EOW की कार्रवाई में समिति के तीन कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है और करीब 13 लाख रुपये के पंजीयन घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि फर्जी काश्तकारों के नाम पर पंजीयन कराकर बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर उसे MSP पर बेचा गया. वहीं दूसरी ओर वास्तविक किसान अपनी उपज लेकर खरीदी केंद्रों पर परेशान होता रहा.

रायसेन की बाड़ी तहसील का मामला

रायसेन जिले की तहसील बाड़ी से जुड़ा है. आरोप है कि वास्तविक किसान ने अपनी मूंग को छन्ना लगाकर, ग्रेडिंग कर और सुखाकर खरीदी केंद्र तक पहुंचाया. इसके बावजूद तुलाई के दौरान उससे कथित तौर पर तीन किलो अतिरिक्त मूंग की मांग की गई. एक तरफ असली किसान अपनी उपज की तुलाई के लिए परेशान होता रहा, तो दूसरी तरफ EOW की जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आए, जिनके नाम पर कथित रूप से फर्जी सिकमीदार बनाकर पंजीयन कराया गया.

बरेली मंडी खरीदी से गई मूंग

आरोप है कि बरेली मंडी से करीब 1500 से 3300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मूंग खरीदकर उसे 8558 से 8682 रुपये के समर्थन मूल्य पर बेच दिया गया. यानी बाजार में सस्ती मूंग खरीदकर सरकारी खरीदी में MSP का फायदा उठाने का कथित खेल चला। EOW ने अब इस मामले में समिति के तीन कर्मचारियों-श्रीराम ठाकुर, रंजीत ठाकुर और गौरव ठाकुर को आरोपी बनाया है.

EOW ने फिलहाल समिति के तीन कर्मचारियों को आरोपी बनाया है। लेकिन जांच का दायरा क्या केवल कर्मचारियों तक सीमित रहेगा, या फिर पंजीयन और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी तय होगी. यह बड़ा सवाल है.

क्योंकि अगर फर्जी पंजीयन हुआ, बाजार से मूंग खरीदी गई और उसे MSP पर बेचकर सरकारी राशि का फायदा उठाया गया, तो यह केवल तीन कर्मचारियों का मामला है या पूरे सिस्टम की निगरानी व्यवस्था की विफलता. इसका जवाब जांच में सामने आना बाकी है.

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