भोपाल फर्जी पासपोर्ट मामला: STF ने एजेंट नसीम अख्तर को दबोचा, जांच में सामने आई अफसरों की मिलीभगत
पासपोर्ट
Bhopal News: भोपाल में बांग्लादेशियों के पासपोर्ट फर्जी दस्तावेज के जरिए बनवाने वाले मामले में STF ने भोपाल के रहने वाले एजेंट नसीम अख्तर को गिरफ्तार करके उसके पास से 8 फर्जी पासपोर्ट जब्त किए गए. अख्तर साल 2016 से शहर के एमपी नगर में टूर एंड ट्रेवल्स का काम कर रहा था, इसके बाद उसने पासपोर्ट एजेंट का काम शुरू कर दिया.
STF की पूछताछ में सामने आया कि फर्जी पासपोर्ट गैंग का मुख्य आरोपी रियाल चौधरी नसीम अख्तर को पासपोर्ट बनाने के लिए देता था. जांच में ये भी सामने आया कि पासपोर्ट ऑफिस के अधिकारियों की मिलीभगत के साथ दस्तावेजों में हेरफेर करके फर्जी पासपोर्ट बनाए गए.
मामले में सामने आया कि एक फर्जी पासपोर्ट बनाने के लिए रियाल चौधरी नसीम अख्तर को 25 से 30 हजार रुपये देता था. वहीं एसटीएफ की पूछताछ में नसीम ने भोपाल में अब तक सामने आए करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट मामलों में से 10 पासपोर्ट बनवाने में अपनी भूमिका स्वीकार की है.
नागपुर के मामले में भी सामने आया था नाम
नसीम का नाम वर्ष 2024 में नागपुर में सामने आए एक ऐसे ही मामले में भी आया था. आरोप है कि बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट भोपाल के पते और दस्तावेजों के आधार पर तैयार कराए गए थे. महाराष्ट्र पुलिस की जांच में रैकेट का खुलासा होने के बाद नसीम को गिरफ्तार किया गया था. उसके खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और पासपोर्ट अधिनियम समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.
रियाल चौधरी के कहने पर किए थे ऑनलाइन आवेदन
पूछताछ के दौरान नसीम ने एसटीएफ को बताया कि रियाल चौधरी के कहने पर उसने भोपाल से पासपोर्ट बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए थे. एसटीएफ के अनुसार, रियाल को इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख संचालक माना जा रहा है. उसे उसके एक सहयोगी के साथ पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इसके अलावा महाराष्ट्र से दो ऐसे लोगों को भी पकड़ा गया है, जिनके लिए भोपाल से पासपोर्ट तैयार कराए गए थे.
दूसरे राज्यों तक नेटवर्क फैलने का संदेह
मध्य प्रदेश और नागपुर में मामले सामने आने के बाद एसटीएफ को देश के दूसरे हिस्सों में भी इसी तरह के फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की आशंका है. जांच टीमें असम, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में आरोपियों की तलाश कर रही हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ संदिग्ध पहले असम पहुंचे और बाद में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आकर रहने लगे. आरोप है कि उन्होंने बौद्ध भिक्षु के तौर पर मठों में रहकर स्थानीय पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराए और उन्हीं के आधार पर पासपोर्ट बनवाए.
विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड भी खंगाल रही एसटीएफ
एसटीएफ अब इन पासपोर्ट धारकों की विदेश यात्राओं की भी जांच कर रही है. इसके लिए विदेश मंत्रालय, विमानन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से जानकारी जुटाई जा रही है. जांच में कुछ पासपोर्ट धारकों के थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया और इंडोनेशिया जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है.
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