70 हजार टीचर्स को राहत दिलाने की कोशिश, TET की अनिवार्यता को लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

इसके पहले सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 1998 से 2009 के बीच मध्य प्रदेश में भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए TET परीक्षा अनिवार्य कर दी है.
Supreme Court (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट(File Photo)

MP News: मध्य प्रदेश के 70 हजार टीचर्स को शिक्षक पात्रता परीक्षा(TET) परीक्षा से राहत दिलाने के लिए सरकार एक बार फिर कोशिश कर रही है. 2005 से 2009 के बीच भर्ती होने वाले टीचर्स को राहत दिलाने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है. सुप्रीम कोर्ट ने 1998 से लेकर 2009 के बीच भर्ती होने वाले टीचर्स के लिए TET परीक्षा अनिवार्य कर दी है.

एक हफ्ते में याचिका दायर कर सकती है सरकार

2005 से 2009 के बीच भर्ती होने वाले टीचर्स को राहत दिलाने के लिए सरकार एक हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने पर विचार कर रही है. हालांकि कानूनी जानकारों का कहना है कि याचिका को स्वीकार करने की संभावना कम है, लेकिन अगर ऐसा होता लगभग 70 हजार टीचर्स को राहत मिल सकती है. हालांकि अभी तक किसी संबंधित अधिकारी का पूरे मामले पर कोई बयान नहीं आया है.

पुनर्विचार याचिका में नहीं मिली थी राहत

इसके पहले सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 1998 से 2009 के बीच मध्य प्रदेश में भर्ती होने वाले शिक्षकों के लिए TET परीक्षा अनिवार्य कर दी है. इससे प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख टीचर्स प्रभावित होंगे. हालांकि टीचर्स को राहत दिलाने के लिए सरकार ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका लगाई थी, लेकिन कोर्ट से राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट ने टेट परीक्षा पास करने की अंतिम समय 31 अगस्त 2027 निर्धारित किया था. लेकिन बाद में शिक्षकों को राहत देते हुए इसकी सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षण संचालनालय ने अप्रैल में टेट परीक्षा को लेकर घोषणा की थी. इसमें बताया गया था कि जुलाई और अगस्त में टेट परीक्षा को आयोजित किया जाएगा. इसमें कई चरणों में लगभग डेढ़ लाख टीचर्स के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है.

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