MP News: ग्रामीणों की सजगता से पकड़ी गई अवैध शराब से भरी बोलेरो, पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

MP News: धार जिले के धरमपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम भूरिया कुआं में ग्रामीणों की सतर्कता से अवैध शराब परिवहन का एक बड़ा मामला सामने आया है.
The Excise Department seized a Bolero loaded with illicit liquor

आबकारी विभाग ने अवैध शराब से भरी बोलेरो पकड़ी

रिपोर्ट – सैयद जाफरी

MP News: धार जिले के धरमपुरी थाना क्षेत्र के ग्राम भूरिया कुआं में ग्रामीणों की सतर्कता से अवैध शराब परिवहन का एक बड़ा मामला सामने आया है. सजग ग्रामीणों ने घेराबंदी कर अवैध शराब से भरे एक बोलेरो वाहन को दबोचा और इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी. सूचना मिलते ही धरमपुरी पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन सहित भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त कर थाने ले आई. पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.

​सुबह 8 बजे ग्रामीणों ने घेराबंदी कर पकड़ा वाहन

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 8 बजे शराब तस्करों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में खपाने के लिए बोलेरो वाहन के जरिए अवैध शराब का परिवहन किया जा रहा था. इसी दौरान भूरिया कुआं क्षेत्र में ग्रामीणों को वाहन की गतिविधियों पर संदेह हुआ. कांग्रेस युवा नेता राधेश्याम मुवेल और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए वाहन को रोक लिया. ग्रामीणों को भारी पड़ता देख आरोपी वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए. इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत धरमपुरी पुलिस को सूचित किया.

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर वाहन की तलाशी ली, तो उसमें भारी मात्रा में अवैध शराब भरी हुई थी. ​”ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मौके से बोलेरो वाहन जब्त किया है. वाहन से अलग-अलग ब्रांड की करीब 26 पेटी, कुल 289 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की गई है. अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी गई है.

​मुख्य मार्ग पर ‘ऑफिस’ खोलकर चल रहा है अवैध नेटवर्क

​इस पूरे मामले ने धरमपुरी और धामनोद क्षेत्र में सक्रिय शराब माफिया के रसूख को उजागर कर दिया है. धरमपुरी नगर के मुख्य रोड पर ही शराब तस्करों द्वारा बकायदा एक ‘ऑफिस’ खोलकर पूरे ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की सप्लाई का संचालन किया जा रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी मुख्य मार्ग से दिनभर आबकारी और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों और कर्मचारियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन इसके बावजूद इस अवैध ठिकाने पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. पुलिस और आबकारी की इस ‘मौन स्वीकृति’ के कारण शराब माफिया बेखौफ होकर ग्रामीण क्षेत्रों में अपना जाल फैला रहे हैं.

​कागजों में सिमटी नर्मदा किनारे की शराबबंदी

​तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मां नर्मदा की पवित्रता को बनाए रखने के लिए नर्मदा नदी के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सभी शराब दुकानों को बंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था. धरमपुरी नगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र इसी 5 किलोमीटर के दायरे में आते हैं. लेकिन धरातल पर यह नियम पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है. जब से आधिकारिक दुकानें बंद हुई हैं, तब से शराब माफिया ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है. तस्कर लाइसेंस दुकानों से कम दाम में शराब उठाते हैं और नर्मदा किनारे के प्रतिबंधित ग्रामीण क्षेत्रों में ऊंचे दामों पर बेचकर मोटा कमीशन कमा रहे हैं.

​बढ़ रहे हैं घरेलू विवाद और आपराधिक मामले

​ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बेधड़क सप्लाई अब एक बड़ी सामाजिक समस्या बन चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब की आसानी से उपलब्धता के कारण गांवों में घरेलू हिंसा और विवाद के मामले तेजी से बढ़े हैं. शराब के आदी हो चुके लोग अपनी लत को पूरा करने के लिए चोरी, मारपीट और लूट जैसी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं.

​जिम्मेदार अधिकारी मौन, विपक्ष ने साधा निशाना

​इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता राधेश्याम मुवेल सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. विपक्ष और ग्रामीणों का आरोप है कि धरमपुरी व धामनोद के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लाइसेंसी शराब ठेकेदार और शराब तस्करों की जुगलबंदी चल रही है. चार पहिया और दुपहिया वाहनों के माध्यम से रोजाना लाखों रुपए की अवैध शराब गांवों में भेजी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि जब जनता खुद गाड़ियां पकड़ती है, तब जाकर पुलिस मजबूरी में कार्रवाई करती है. आखिर पुलिस और आबकारी विभाग की नजरों से ये शराब माफिया हमेशा क्यों बच निकलते हैं, यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न बना हुआ है. फिलहाल पुलिस ने बोलेरो को थाना परिसर में खड़ा कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है.

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