इलाज से ज्यादा ‘जुगाड़’ में परेशान मरीज! बकस्वाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था, वसूली के लगे आरोप

Buxwaha Hospital: छतरपुर जिले के बक्सवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात खराब हैं. यहां मरीज अस्पताल की व्यवस्थाओं के कारण ही परेशान नजर आते हैं. इसके अलावा सरकारी अस्पताल होने के बाद भी मरीजों से पैसों की वसूली की जाती है.
बदहाल व्यवस्था की खुली पोल

बदहाल व्यवस्था की खुली पोल

Buxwaha Hospital: छतरपुर जिले के बक्सवाहा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज कम विवाद का पर्याय बन चुका है. आसपास की करीब 39 पंचायतों के लोगों के लिए सबसे बड़ा सरकारी इलाज केंद्र माना जाता है. रोजाना सैकड़ों मरीज यहां उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन हर बार ही उन्हें निराशा हाथ लगती है. मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि यहां इलाज से ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

अस्पताल पहुंचने वाला हर मरीज सबसे पहले पर्ची कटवाता है, जिसके लिए तय शुल्क उससे वसूल किया जाता है. इसके बाद डॉक्टर जांच कर दवाइयां लिख देते हैं और मरीजों को ओपीडी से दवा लेने भेजा जाता है. आरोप है कि अगर मरीज को ग्लूकोज या सलाइन चढ़ाने की जरूरत पड़ जाए तो असली मुश्किल वहीं से शुरू होती है. कई लोगों का कहना है कि अस्पताल में जरूरी बाटल और सामान अक्सर उपलब्ध नहीं रहते, जिसके कारण मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर से सामान खरीदना पड़ता है.

सबसे गंभीर आरोप यह है कि सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सलाइन बाटल लगाने के नाम पर भी मरीजों से पैसे वसूले जाते हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि एक बाटल लगाने पर 200 रुपये तक लिए जाते हैं. यदि रोजाना बड़ी संख्या में मरीजों को बाटल लगती हैं, मरीज या उनके परिजन पैसे देने का विरोध करते हैं, तो उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह वसूली किसके संरक्षण में चल रही है.

अस्पताल को ही है इलाज की ज़रूरत

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. भीषण गर्मी में मरीजों और उनके परिजनों के लिए ठंडे पानी तक की व्यवस्था है. आरोप है कि अस्पताल में आरओ पानी की सुविधा आम मरीजों को नहीं मिलती, जबकि अधिकारियों और स्टाफ के लिए अलग व्यवस्था रहती है. मरीजों के लिए केवल एक सामान्य पानी की टंकी है, जिसकी साफ-सफाई भी नहीं की जाती है.

पहले भी विवादों में रहा अस्पताल प्रबंधन

यह पहला मौका नहीं है जब सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हों. इससे पहले भी अस्पताल में दवा की कमी, मरीजों से अवैध वसूली, साफ-सफाई की खराब स्थिति और बुनियादी सुविधाओं के अभाव जैसे मामले सामने आ चुके हैं. कई बार जांच के आदेश भी दिए गए, लेकिन जमीनी हालात में ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला.

स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि अस्पताल में हो रही कथित वसूली और अव्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच हो तथा मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं वास्तव में धरातल पर उपलब्ध कराई जाएं.

क्‍या कहते हैं अध‍िकारी?

ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सत्यम असाटी ने कहा कि अस्पताल की दीवारों पर बड़े अक्षरों में शिकायत संबंधी सूचना लिखवाई गई है. यदि कोई कर्मचारी मरीजों से पैसे मांगता है तो मरीज तत्काल शिकायत करें, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

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