MP News: एमपी में सड़कों की बढ़ेगी उम्र, नई तकनीक और सख्त निगरानी से 10 से15 साल तक टिकाऊ होंगी सड़कें

MP News: मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकार ने नई तकनीकों और सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था पर जोर देना शुरू कर दिया है.
Roads in Madhya Pradesh will be made durable

मध्‍य प्रदेश में सड़कों को बनाया जाएगा टिकाऊ

MP News: मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए सरकार ने नई तकनीकों और सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था पर जोर देना शुरू कर दिया है. लक्ष्य है कि सड़कों की औसत आयु 5-7 वर्ष से बढ़ाकर 10-15 वर्ष तक की जाए, जिससे बार-बार मरम्मत की आवश्यकता कम हो और दीर्घकाल में रखरखाव खर्च घटे.

निर्माण प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव

सूत्रों के अनुसार निर्माण प्रक्रिया में संशोधित बिटुमिन, जियो-टेक्सटाइल लेयर और सीमेंट ट्रीटेड बेस जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाएगा. शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक ड्रेनेज डिजाइन को अनिवार्य किया जा रहा है, ताकि बारिश के दौरान जलभराव से सड़कों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके. इन उपायों से सड़क की संरचना अधिक मजबूत और दीर्घकालीन होगी.

विशेषज्ञों की राय और संभावित लाभ

पूर्व चीफ इंजीनियर बी.पी. पटेल का कहना है कि यदि नई तकनीकों का सही और मानक अनुसार उपयोग किया जाए तो सड़कों की आयु दोगुनी हो सकती है. इससे न केवल मजबूती बढ़ेगी, बल्कि गड्ढों और फिसलन की समस्या कम होने से सड़क हादसों में भी कमी आएगी. बेहतर गुणवत्ता से यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा.

नई तकनीकें – क्या बदल रहा है?

व्हाइट टॉपिंग के तहत पुरानी डामर सड़क पर सीमेंट कंक्रीट की परत बिछाई जाएगी, जिससे सड़क की आयु 15–20 वर्ष तक हो सकती है और मेंटेनेंस की आवश्यकता कम होगी. माइक्रो सरफेसिंग में पॉलिमर मिश्रित पतली परत डाली जाएगी, जिससे दरारें कम होंगी और फिसलन में कमी आएगी. ग्लास ग्रिड तकनीक के अंतर्गत सड़क की परतों के बीच फाइबर ग्लास का जाल बिछाया जाएगा, जिससे रिफ्लेक्टिव क्रैकिंग कम होगी. वेस्ट प्लास्टिक मिश्रित सड़क निर्माण में प्रोसेस किए गए प्लास्टिक को बिटुमिन में मिलाया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ जलरोधक क्षमता और मजबूती में वृद्धि होगी.

गुणवत्ता नियंत्रण के प्रमुख उपाय

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण सामग्री की अनिवार्य लैब टेस्टिंग की जाएगी. बिटुमिन, एग्रीगेट और कंक्रीट की नियमित जांच होगी. जीपीएस आधारित रीयल-टाइम प्रोजेक्ट ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाएगा और ऑनलाइन प्रगति रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी. इसके साथ ही स्वतंत्र एजेंसी द्वारा थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा. इंजीनियरों और ठेकेदारों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाएगी, ताकि मानकों से किसी प्रकार का समझौता न हो.

सख्त कार्रवाई के प्रावधान

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित मानकों से समझौता करने पर संबंधित एजेंसी पर जुर्माना लगाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा. ठेकेदारों की बैंक गारंटी कार्य पूर्ण होने के बाद निर्धारित अवधि तक जमा रहेगी और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी अनुबंध में स्पष्ट रूप से तय की जाएगी.

सरकार का मानना है कि तकनीकी नवाचार और सख्त निगरानी के संयुक्त प्रयास से प्रदेश में सड़क अधोसंरचना की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा और आम नागरिकों को बेहतर एवं सुरक्षित यातायात सुविधा मिल सकेगी.

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