कैदी से बने DSP, हथकड़ी पहनकर दी परीक्षा, अब MPPSC में 12वीं रैंक, जैनेंद्र कुमार की शानदार सक्सेस स्टोरी
DSP जैनेंद्र कुमार
Prisoner to MPPSC Topper: ऐसा कहा जाता है कि जेल जाना किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बुरा अनुभव होता है. ये व्यक्ति को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक तौर पर कमजोर कर देता है लेकिन इसके विपरीत मध्य प्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले जैनेंद्र कुमार ने वो कारनामा करके दिखाया है, जिसकी लोग मिसाल दे रहे हैं. उन पर फर्जी केस लगाए गए. घर में आगजनी की गई. हथकड़ी पहनकर एग्जाम सेंटर पहुंचे और उसी हालत में उन्होंने परीक्षा दी. इससे भी चौंकाने वाली बात ये है कि MPPSC में 12वीं रैंक हासिल की और DSP बने.
पिता ने भी दी थी परीक्षा
जैनेंद्र कुमार निगम भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के रहने वाले हैं. सामान्य किसान परिवार से आते हैं. पिता केशव कुमार निगम किसान और मां कुसुम हाउसवाइफ हैं. जानकारी के मुताबिक जैनेंद्र कुमार के पिता केशव खुद भी प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहते थे. ऐसा कहा जाता है कि साल 1996 से 2000 तक पांच परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो सके. पारिवारिक जिम्मेदारियों और आर्थिक तंगी की वजह से अफसर बनने का सपना पूरा नहीं हो सका.
पैदल भारत यात्रा पर निकले
साल 2019 और 2020 में जैनेंद्र कुमार के जीवन में नया मोड़ आया, जब उन पर और उनके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया. आपसी रंजिश के चलते 14 अक्तूबर 2019 को उन पर, उनके भाई और पिता पर फर्जी FIR दर्ज करवायी गई. निर्दोष साबित होने के बाद जेल से बाहर आए और भारत की पैदल यात्रा पर निकल गए. वे जम्मू कश्मीर पहुंचे लेकिन 24 मार्च 2020 को कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन लग गया.
फर्जी केस दर्ज कर जेल भेजा
साल 2020 के अप्रैल महीने में जैनेंद्र कुमार के माता-पिता पर हमला किया गया. पुलिस ने उल्टी कार्रवाई करते हुए, माता-पिता समेत उन पर फर्जी केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया. इसी दौरान वे सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे थे. उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा दी. हकड़ी में उन्हें एग्जाम सेंटर ले जाया गया. जहां उनके एक हाथ में हथकड़ी की जंजीरें और दूसरे हाथ में पेन था.
इंदौर में की परीक्षा की तैयारी
इन सारी मुसीबतों के बावजूद भी जैनेंद्र ने हार नहीं मानी. उन्होंने डीएसपी बनने का पक्का मन बना लिया. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अच्छे से हो सके इसके लिए वे इंदौर आकर रहने लगे. इसी बीच उन पर हत्या के प्रयास (धारा-307) के तहत झूठा मामला दर्ज करा दिया गया. उनके परिवार के सदस्य का एक्सीडेंट करा दिया गया. उनके भाई और मां की कमर की हड्डियां टूट गई थी. दोनों अस्पताल भर्ती कराना पड़ा. ये साल 2021 की बात है.
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आखिरकार जैनेंद्र बने डीएसपी
MPPSC 2020 में दी परीक्षा में वे नायब तहसीलदार बने. हालांकि साल 2021 में दी परीक्षा में उनका चयन नहीं हो पाया. MPPSC 2022 स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक संचालक का पद हासिल किया. साल 2023 में जैनेंद्र कुमार को मलेरिया और टाइफाइड हो गया. सुबह ड्रिप लगवाते थे और दोपहर में एग्जाम देने जाते थे. साल 2025 में जब परिणाम आया तो मानो उन्हें सबकुछ मिल गया हो. उन्होंने अपने मम्मी-पापा को कॉल करके खुशखबरी सुनाई. पिता से कहा कि पापा मैं डीएसपी बन गया.