श्योपुर में शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस का किया विरोध, बोले- सुविधा और सुरक्षा दें, तभी लागू होगी व्यवस्था

Sheopur News: शिक्षकों का कहना है कि जिले के अधिकांश स्कूल छोटे-छोटे गांवों और दूरदराज़ के इलाकों में संचालित हैं. जहां रहने की समुचित व्यवस्था नहीं है. मजबूरी में अधिकांश शिक्षक कस्बों और शहरों से प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर विद्यालय पहुंचते हैं.
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श्योपुर: शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस का विरोध किया

Sheopur News: (हेमकुमार तिवारी की रिपोर्ट) मध्य प्रदेश में लागू की जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों में लगातार नाराजगी बढ़ती जा रही है. विजयपुर क्षेत्र के शिक्षकों ने इस व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से इसे तत्काल प्रभाव से पुनर्विचार करने की मांग की है. शिक्षकों का कहना है कि जब तक उन्हें दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित आवास, मूलभूत सुविधाएं और पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक ई-अटेंडेंस जैसी व्यवस्था को लागू करना उचित नहीं है.

शिक्षकों का क्या कहना है?

शिक्षकों का कहना है कि जिले के अधिकांश स्कूल छोटे-छोटे गांवों और दूरदराज़ के इलाकों में संचालित हैं. जहां रहने की समुचित व्यवस्था नहीं है. मजबूरी में अधिकांश शिक्षक कस्बों और शहरों से प्रतिदिन लंबी दूरी तय कर विद्यालय पहुंचते हैं. बरसात के मौसम में उफनते नदी-नाले, खराब सड़कें और आवागमन की कठिन परिस्थितियां उनके लिए बड़ा जोखिम बन जाती हैं. कई बार समय पर विद्यालय पहुंचने की जल्दबाजी में शिक्षक सड़क दुर्घटनाओं का भी शिकार हो चुके हैं.

‘शिक्षा की गुणवत्ता का पैमाना’

शिक्षकों ने कहा कि केवल समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना ही शिक्षा की गुणवत्ता का पैमाना नहीं हो सकता. एक शिक्षक विद्यालय में पढ़ाने के साथ-साथ निर्वाचन कार्य, जनगणना, सर्वे, टीकाकरण अभियान, विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन तथा अन्य कई गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी निभाता है. ऐसे में केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर उनकी कार्यप्रणाली का मूल्यांकन करना न्यायसंगत नहीं है.

‘मानसिक दबाव बढ़ रहा है’

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यालयों में बैठकर नीतियां बनाने वाले अधिकारी जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं. बिना वास्तविक परिस्थितियों को समझे लागू किए जा रहे आदेशों से शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ रहा है. उनका कहना है कि कई स्थानों पर ई-अटेंडेंस को स्थानांतरण, अनुशासनात्मक कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव का माध्यम बनाया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है.

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शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि यदि वास्तव में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है तो पहले ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों के लिए सुरक्षित आवास, बेहतर सड़क संपर्क, इंटरनेट सुविधा और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. इसके बाद ही किसी नई तकनीकी व्यवस्था को लागू किया जाए.

‘ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर पुनर्विचार करें’

शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि वे तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था का विरोध करेंगे जो जमीनी परिस्थितियों की अनदेखी कर केवल दबाव बनाने का माध्यम बन जाए. उनका कहना है कि सरकार शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से सुने और ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर पुनर्विचार करे. यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो प्रदेशभर के शिक्षक संगठित होकर इस व्यवस्था के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज करेंगे.

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