Jabalpur: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल! स्व सहायता समूह से जुड़कर कुंडम की भारती बनीं लखपति दीदी
जबलपुर की भारती स्व सहायता समूह से जुड़कर बनीं लखपति दीदी
Jabalpur News: आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और इसकी अब सुखद परिणाम भी सामने आने लगे हैं. जबलपुर के आदिवासी क्षेत्र कुंडम में महिलाएं आजीविका मिशन के तहत स्वास्थ्य सहायता समूह से जुड़कर हजारों रुपए हर महीने कमा रही है. छोटे-छोटे प्रयासों और समूह के योगदान से महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बढ़ रही है बल्कि अपने आसपास के व्यापार को भी बढ़ावा दे रही है. जबलपुर के कुंडम क्षेत्र में ऐसे ही कुछ महिलाओं ने मुर्गी पालन को अपना व्यापार बनाया और आभार महीने हजारों रुपए कमा रही है.
आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
मध्य प्रदेश आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. इसका उदाहरण कुण्डम विकासखंड के ग्राम तिलसानी की भारती मार्को हैं. उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे इसका विस्तार किया. आज उनके पोल्ट्री फार्म में 200 मुर्गियों और चूजों का पालन किया जा रहा है. इसके साथ ही वे चूजों की सप्लाई और पशु आहार की दुकान से भी आय अर्जित कर रही हैं. इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने करीब 12 से 15 हजार रुपए की आय हो रही है. अपने प्रयासों से वे लखपति दीदी की श्रेणी में भी शामिल हो गई हैं.
40 हजार रुपये में बनवाया शेड
भारती साल 2018 में मां शारदा स्व-सहायता समूह से जुड़ी थीं. वर्ष 2024 में उन्होंने मुर्गी पालन शुरू करने का निर्णय लिया. समूह से 50 हजार रुपए का ऋण लिया और 40 हज़ार रूपये से शेड का निर्माण करवाया. इसके बाद शेष राशि और अपने प्रयासों से जुटाकर करीब एक लाख रुपए की लागत से पोल्ट्री फार्म तैयार किया. शुरुआत में उन्होंने 100 चूजों के साथ व्यवसाय शुरू किया. मेहनत और अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ाया और अब वे 200 मुर्गियों और चूजों का पालन कर रही हैं. उनके फार्म में देशी और हाइब्रिड नस्लों के बीच लोकप्रिय सोनाली किस्म के मुर्गे-मुर्गियां और चूजे उपलब्ध हैं.
भारती के पोल्ट्री फार्म से अंडों की बिक्री भी होती है. वे बताती हैं कि सीजन में उनके यहां उत्पादित अंडे जबलपुर तक बिक्री के लिए जाते हैं. इससे उन्हें घर बैठे करीब 10 रूपये प्रति अंडा सोनाली से और 12 रुपए देशी अंडे का दाम मिल जाता है. इसके अलावा वे आसपास के ग्राहकों को चूजों की सप्लाई भी करती हैं. वर्तमान में भारती पशु आहार, दाना, फीड और मुर्गी पालन से जुड़ी जरूरी सामग्री भी उपलब्ध करा रही हैं.
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अपने दम पर खड़ा किया व्यवसाय
समूह से मिले ऋण और अपनी मेहनत के दम पर भारती ने न केवल अपना व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि आसपास के लोगों को भी मुर्गी पालन से जुड़ने में सहयोग दिया. उनकी पहल से ग्रामीण क्षेत्र में भी इस ओर स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं. पोल्ट्री फार्म, पशु आहार की दुकान के जरिए वे अपनी आय बढ़ा रही है.