कटनी के किसान ने कर दिया कमाल, तपते मौसम में उगा दिया 4 लाख रुपये प्रति किलो कश्मीरी केसर
कटनी में हुई कश्मीरी केसर की खेती
केसर, जिसे ‘लाल सोना’ भी कहा जाता है, का नाम सुनते ही सबसे पहले कश्मीर और बर्फीले पहाड़ों की याद आती है. ऐसा माना जाता है कि केसर की खेती के लिए केवल कश्मीर का वातावरण ही उपयुक्त है और वहीं इस बेशकीमती केसर की खेती की जा सकती है. लेकिन आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि अब एमपी के कटनी में भी केसर की खेती हो सकती है. यहां के एक किसान ने ये करिश्मा कर दिखाया है.
25 से 30 बीजों के साथ किया प्रयोग
कश्मीर की वादियों में खिलने वाला लाल सुर्ख केसर अब कटनी की मिट्टी में भी अपनी खुशबू बिखेर रहा है. ढीमरखेड़ा के किसान माखन लाल यादव ने पाली मरसिहुड़ी में केसर उगाकर खेती में नवाचार की नई इबारत लिखी और किसानों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले. किसान ने महज 25 से 30 बीजों से केसर की खेती का प्रयोग शुरू किया. उनकी यह पहल बताती है कि खेती में कुछ नया करने की जिज्ञासा किसानों के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोल सकती है.
एक जानकारी बनी नई शुरुआत
माखन लाल यादव को उनके गांव में राजस्थान से गर्म कपड़े बेचने आने वाले कुछ लोगों से बातचीत के दौरान पता चला कि उनके क्षेत्र में केसर की खेती की संभावना हो सकती है. इस जानकारी ने उनके मन में उत्सुकता जगाई. उन्होंने बीज मंगवाए और अपने खेत के छोटे-से हिस्से में बो दिए. नियमित देखभाल के बाद पौधों में गांठें बनने लगीं और लाल सुर्ख फूल खिल उठे. खेत में खिले इन फूलों को देखकर किसान का उत्साह बढ़ा और उन्होंने आसपास के लोगों को भी अपना प्रयोग दिखाया.
पंखुड़ियों से बढ़ी उम्मीद
माखन लाल ने फूलों की पंखुड़ियां एकत्रित कर सुखाईं. स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने पर उन्हें इसकी कीमत करीब 400 रुपये प्रति ग्राम तक बताए जाने की जानकारी मिली. इससे उनकी उत्सुकता और बढ़ी. हालांकि, वास्तविक आमदनी का आकलन उपज की गुणवत्ता, बिक्री योग्य मात्रा और बाजार में मिलने वाली कीमत से ही होगा.
बाजार तक पहुंचाने में एफपीओ की मदद
किसानों की उपज को बेहतर बाजार दिलाने के उद्देश्य से मानव जीवन विकास समिति द्वारा संचालित संगमबीडी एफपीओ काम कर रहा है. समिति के सचिव एवं पर्यावरणविद् निर्भय सिंह के अनुसार, एफपीओ किसानों को बड़ी कंपनियों और नीमच मंडी जैसे बाजारों तक पहुंच बनाने में सहयोग देता है. समिति के कार्यकर्ता सुरेश दुबे ने गांव में किसान यादव से मुलाकात के दौरान उनके केसर उत्पादन का अनुभव जाना. माखन लाल यादव का यह प्रयोग खेती में नवाचार की प्रेरक मिसाल है.