‘मम्मी के साथ रहेंगे…’, बच्चे के जवाब पर हाई कोर्ट का फैसला- मां के साथ ज्यादा सुरक्षित है बच्चा
एमपी हाई कोर्ट
MP High Court Decision: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बच्चे की कस्टडी को लेकर स्थिति उस वक्त दिलचस्प बन गई, जब जज ने बच्चे से पूछा कि वह किसके साथ रहेगा? जब बच्चे ने कहा कि वह मां के साथ रहना चाहता है तो अदालत ने भी इसे स्वीकार कर लिया. अंतरिम कस्टडी मां को सौंप दी गई. इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने माता-पिता को फटकार भी लगाई.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच बच्चे की मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान कोर्ट रूम में बच्चे के पिता, दादी, नाना और मां मौजूद रहीं. न्यायालय ने पाया कि दोनों पक्ष यानी बच्चे की माता और पिता दोनों आर्थिक तौर पर कमजोर हैं. पिता मजदूर करते हैं. इसके साथ ही बच्चे के पिता ने बताया वे मजदूरी करके महीने में 10000 रुपये कमाते हैं. कभी-कभार शराब का सेवन भी करते हैं और पत्नी पर भी आरोप लगाए.
दादी और नाना ने किया इनकार
कोर्ट ने दादी से पूछा कि क्या आप पिता की गैर-मौजूदगी में बच्चे का ख्याल रख सकती हैं? इस पर उन्होंने कहा कि ये उनके बेटे की जिम्मेदारी है. जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद अदालत ने नाना से पूछा कि आप क्या चाहते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि बेटी ससुराल लौट जाए. उनके पास अन्य बच्चे भी हैं, जिनकी उन्हें देखभाल करनी है.
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अदालत का क्या कहना है?
इस बारे में अदालत का कहना है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है. पति-पत्नी आपस में बच्चों की कीमत के लिए लड़ रहे हैं. आगे कहा कि बच्चे का कहना है कि मां उससे बहुत प्यार करती है. वह अपनी मां के साथ ही रहना चाहता है. पिता की तुलना में बच्चा मां के साथ खुद को ज्यादा सुरक्षित पाता है.