MP News: बिना गर्भधारण के महिला को बना दिया गर्भवती, प्रेग्नेंसी कार्ड बनाकर लगाए टीके, स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
पीड़ित महिला
रिपोर्ट – संजीव क्रिडिया, सिवनी
MP News: सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड अंतर्गत सिविल अस्पताल के अधीन उप स्वास्थ्य केंद्र घरगोंदी में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. यहां घरगोंदी निवासी 26 वर्षीय सनिला यादव को बिना गर्भधारण के ही सरकारी रिकॉर्ड में गर्भवती दर्ज कर दिया गया. इतना ही नहीं, उनके नाम से प्रेग्नेंसी कार्ड बनाकर गर्भवती महिलाओं को लगाए जाने वाले टीके लगाए गए और आयरन की गोलियां भी वितरित कर दी गईं. मामला उजागर होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.
पहले भी गर्भवती दर्ज की गई थी महिला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सनिला यादव को पिछले वर्ष भी गर्भवती के रूप में दर्ज किया गया था. हैरानी की बात यह है कि 8 मई 2026 को उन्हें दोबारा तीन माह की गर्भवती बताते हुए स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में शामिल कर लिया गया. बिना पर्याप्त चिकित्सकीय पुष्टि के महिला का नाम गर्भवती महिलाओं की सूची में जोड़ दिया गया और उसके अनुसार उपचार एवं निगरानी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.
सोनोग्राफी रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई
बाद में महिला को संदेह होने पर 27 मई को केवलारी सिविल अस्पताल पहुंचना पड़ा. वहां डॉक्टर की सलाह पर उनकी सोनोग्राफी कराई गई. जांच रिपोर्ट आने पर पता चला कि वह गर्भवती नहीं हैं और उनकी रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य है. चौंकाने वाली बात यह रही कि तब तक सनिला यादव स्वास्थ्य कर्मियों के निर्देशानुसार दवाइयों का सेवन करती रही थीं और उन्हें गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं भी दी जा चुकी थीं.
रिकॉर्ड सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की रिकॉर्ड सत्यापन प्रणाली और फील्ड स्तर पर की जाने वाली जांच प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं. बिना पर्याप्त पुष्टि के गर्भावस्था दर्ज करना और उसके आधार पर टीकाकरण एवं दवाइयों का वितरण करना विभागीय लापरवाही का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है. लगातार दूसरी बार हुई ऐसी गलती ने विभागीय निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
बीएमओ ने किट में खराबी को बताया कारण
मामले में संबंधित ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) ने प्रारंभिक सफाई देते हुए कहा कि मेडिकल जांच किट में खराबी आने के कारण यह त्रुटि हुई. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एक किट के आधार पर गर्भावस्था दर्ज करने के बजाय अन्य चिकित्सकीय जांचों और पुष्टि की प्रक्रिया भी अपनाई जानी चाहिए. ऐसे में बीएमओ के इस स्पष्टीकरण के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं.
समय रहते जांच नहीं होती तो दबा रह जाता मामला
यदि सनिला यादव ने समय रहते दोबारा जांच नहीं कराई होती, तो यह मामला सरकारी रिकॉर्ड तक ही सीमित रह सकता था. इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता नियंत्रण, निगरानी व्यवस्था और लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी है. लोगों का कहना है कि ऐसी लापरवाही मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है.
सीएमएचओ ने गठित की जांच समिति
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) जयपाल सिंह ठाकुर ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है. उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की गंभीरता से जांच की जाएगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने मामले की जांच के लिए समिति भी गठित कर दी है.
पीड़ित महिला ने बताई अपनी आपबीती
सनिला यादव ने बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्भवती बताकर दवाइयां दी गईं और नियमित रूप से स्वास्थ्य संबंधी सलाह भी दी जाती रही. बाद में जब उन्हें संदेह हुआ तो उन्होंने स्वयं अस्पताल जाकर जांच कराई, जहां सोनोग्राफी रिपोर्ट में गर्भवती न होने की पुष्टि हुई. इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई.
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