Seoni News: सिवनी में नीलगिरी के पेड़ों की अवैध कटाई! ग्रामीणों ने जताई नाराजगी, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

Seoni News: कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. अवैध कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए. साथ ही यह भी जांच की जाए कि सरकारी भूमि पर वृक्षों की कटाई किसकी अनुमति से की गई
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सिवनी में नीलगिरी के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला

Seoni News: ( सिवनी से संजीव क्रिडिया की रिपोर्ट) जिले की ग्राम पंचायत मुण्डरईखुर्द के अंतर्गत भमोड़ी जलाशय से लगी सरकारी भूमि पर लगे नीलगिरी के वृक्षों की अवैध कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. नाराज ग्रामीणों और जलाशय समिति के पूर्व अध्यक्ष जिला मुख्यालय के कलेक्टर ऑफिस में पहुंचकर सिवनी कलेक्टर से शिकायत की है. वहीं पूरे मामले को लेकर निष्पक्ष और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरकारी भूमि पर लगे लगभग 30 वर्ष पुराने पेड़ों को अवैध रूप से काटकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाया गया है.

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए बताया कि भमोड़ी जलाशय से लगी करीब पांच एकड़ सिंचाई विभाग की सरकारी भूमि पर बड़ी संख्या में नीलगिरी के पेड़ लगे हुए थे. 25 मई को कुछ लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से आधुनिक मशीनों की मदद से इन पेड़ों की कटाई की और लकड़ी को ट्रकों में भरकर वहां से ले जाया गया. ब्राह्मणों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा कई बार पेड़ों की कटाई के संबंध में संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को समय-समय पर सूचना दी गई थी लेकिन समय रहते अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की.

ग्रामीणों ने जताई माफिया की आशंका

ग्रामीणों ने बताया कि करीब तीन दशक पुरानी पेड़ों की कटाई की गई. आर्थिक रूप से मूल्यवान से पेड़ों की कटाई बहुत ही गोपनीय तरीके से की गई. कटाई के तुरंत बाद काटी गई लकड़ी को योजनाबद्ध तरीके से परिवहन कर लिया गया, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने आशंका जताई है कि इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों और माफियाओं की भूमिका हो सकती है.

इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की

कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और अवैध कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए. साथ ही यह भी जांच की जाए कि सरकारी भूमि पर वृक्षों की कटाई किसकी अनुमति से की गई और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की.

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सरकारी संपत्ति को पहुंच रहा नुकसान

ग्रामीणों ने कहा कि एक ओर शासन द्वारा पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर हरे-भरे और वर्षों पुराने पेड़ों की कटाई चिंता का विषय है. उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो पर्यावरण और सरकारी संपत्तियों को लगातार नुकसान पहुंचता रहेगा.

फिलहाल पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और अवैध कटाई के आरोपों में शामिल लोगों के खिलाफ किस प्रकार के कदम उठाए जाते हैं.

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