MP में आबकारी विभाग को 3 दिनों में 5 हजार करोड़ जुटाने की चुनौती, 31 फीसदी शराब दुकानें नीलामी से बाहर
प्रतीकात्मक तस्वीर
MP News: मध्य प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों की नीलामी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन आबकारी विभाग के सामने अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. विभाग को महज तीन दिनों में करीब 5,052 करोड़ रुपए जुटाने हैं, क्योंकि अभी तक लगभग 31 प्रतिशत दुकानें नीलाम नहीं हो सकी हैं. आबकारी विभाग द्वारा तय कुल लक्ष्य 19,952.89 करोड़ रुपए के मुकाबले अब तक 14,544.81 करोड़ रुपए की दुकानों की नीलामी हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का 72.90 प्रतिशत है.
31 फीसदी दुकानों की नीलामी जारी
यह आंकड़ा मौजूदा रिजर्व प्राइस (आरपी) से 4.71 प्रतिशत अधिक है और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के राजस्व से 25.69 प्रतिशत ज्यादा बताया जा रहा है. फिलहाल करीब 69.6 प्रतिशत दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 31 प्रतिशत दुकानों पर प्रक्रिया जारी है. नीलामी के शुरुआती दौर के बाद तीसरे राउंड से इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी, लेकिन आठवें राउंड में एक बार फिर तेजी देखने को मिली.
इस चरण में करीब 2,141.07 करोड़ रुपए के ठेके उठाए गए. हालांकि, इस राउंड में रिजर्व प्राइस की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत तक कम दरों पर बोली लगी. भोपाल जिले में भी स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. यहां 87 शराब दुकानों में से अभी भी 38 दुकानों की नीलामी शेष है.
घाटे वाली दुकानों पर संकट
आबकारी विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती घाटे वाली दुकानों की नीलामी को लेकर है. इन दुकानों में ठेकेदारों की दिलचस्पी कम देखी जा रही है. यदि ये दुकानें नहीं उठती हैं, तो विभाग के लिए तय राजस्व लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है. विभाग ने इस बार रणनीति में बदलाव करते हुए समूह प्रणाली को खत्म कर सिंगल दुकानों की नीलामी शुरू की है. पहले समूहों में लाभ और हानि वाली दुकानों को साथ रखा जाता था, जिससे ठेकेदार निवेश से बचते थे. नई व्यवस्था के बाद आठवें राउंड में भागीदारी और प्रतिस्पर्धा दोनों में बढ़ोतरी देखी गई है.
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कम दरों पर भी उम्मीद
विभाग का अनुमान है कि यदि शेष दुकानों की नीलामी औसत वार्षिक मूल्य से 5 से 15 प्रतिशत कम दर पर भी होती है, तब भी कुल राजस्व 18,839 करोड़ से 19,597 करोड़ रुपए के बीच रह सकता है. आखिरी दौर में पहुंच चुकी इस नीलामी प्रक्रिया में आबकारी विभाग के सामने लक्ष्य हासिल करने की बड़ी चुनौती है. अब सबकी नजर अगले तीन दिनों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि विभाग अपना राजस्व लक्ष्य पूरा कर पाता है या नहीं.