MP में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण देने का मामला, HC ने पुरुष अभ्यर्थियों को दी बड़ी राहत
जबलपुर हाई कोर्ट(File Photo)
MP News: नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण को चुनौती देने वाले 10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई हैं. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने हाईकोर्ट के निर्देश दिए हैं हालांकि इन अभ्यर्थियों का परीक्षा परिणाम हाईकोर्ट के फैसले के अधीन होगा. इसके साथ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार सहित ईएसबी को नोटिस जारी कर मांगा जबाब हैं.
हाई कोर्ट ने ESB से मांगा जवाब
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस विशाल घगट की एकलपीठ ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर होने वाली 800 से अधिक पदों पर भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका में सुनवाई कर जबलपुर निवासी संतोष कुमार लोधी सहित 10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को मेडिकल कॉलेजो में नर्सिंग ऑफिसर के विज्ञापित पदों पर आवेदन करने तथा भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए हैं. हालांकि इनके परिणाम याचिका में पारित अंतिम निर्णय के अधीन होंगे. एकलपीठ ने मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है. याचिकाकर्ताओं की ओर अधिवक्ता विशाल बघेल ने कोर्ट को बताया कि कर्मचारी चयन मंडल के विज्ञापन (नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026) में नर्सिंग ऑफिसर के पदों को 100% केवल महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित कर दिया गया है. इससे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन करने से पूरी तरह वंचित हो गए हैं.
हाईकोर्ट के समक्ष तर्क दिए गए कि , ‘मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023’ के तहत नर्सिंग ऑफिसर के पद के लिए कोई लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं है. मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के भर्ती विज्ञापन में किया गया यह प्रावधान वैधानिक नियमों के विपरीत है याचिका में तर्क दिया गया है कि पुरुष और महिला दोनों एक ही पाठ्यक्रम (B.Sc. नर्सिंग/GNM) पढ़ते हैं और उनके पास समान योग्यता व पंजीकरण होता है. केवल लिंग के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः बाहर करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है. याचिका में मांग की गई है कि विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए जो 100% पदों को महिलाओं के लिए आरक्षित करता है.