मध्य प्रदेश महिला आयोग की नई अध्यक्ष बनीं रेखा यादव; 6 साल बाद हुई नियुक्ति, साधना स्थापक को बनाया गया सदस्य

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जब बनी थी तो शोभा ओझा को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन कमलानथ वाली कांग्रेस सरकार ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकी. इसके बाद शिवराज सरकार ने शोभा ओझा को पद से हटा दिया था, जिसके बाद शोभा ओझा कोर्ट चली गईं और नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई थी.
Madhya Pradesh Women's Commission Chairperson Rekha Yadav (File Photo).

मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव(File Photo).

MP News: मध्य प्रदेश महिला आयोग को अपना नया अध्यक्ष मिल गया है. रेखा यादव को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. ये नियुक्ति 6 साल के बाद हुई है. 6 सालों से ये पद खाली था. साल 2020 में कांग्रेस की कलमनाथ सरकार ने शोभा ओझा को एमपी महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया था. जिसके बाद शिवराज की सरकार के शोभा ओझा को पद से हटाए जाने के बाद वो कोर्ट चली गईं थी. इसके बाद से मध्य प्रदेश महिला आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति रुकी हुई थी.

साधना स्थापक बनाई गईं आयोग की सदस्य

मध्य प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बनाई गईं रेखा यादव का कार्यकाल 3 सालों के लिए रहेगा. वहीं साधना स्थापक को आयोग का सदस्य बनाया गया है. रेखा यादव और साधना स्थापक दोनों ही विधायक रह चुकी हैं. साधना स्थापक इसके पहले कांग्रेस में थीं और कांग्रेस से ही जीतकर वे दो बार विधायक बनी हैं. लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से पहले वे बीजेपी में शामिल हो गईं थीं.

रेखा यादव की नियुक्ति से पहले था स्थानीय विरोध

बताया जा रहा है कि रेखा यादव की मध्य प्रदेश महिला आयोग में नियुक्ति से पहले स्थानीय स्तर पर काफी विरोध था. हालांकि लोगों की नाराजगी को मैनेज करने के बाद सामंजस्य बिठाते हुए रेखा यादव के नाम का ऐलान किया गया है. रेखा यादव बड़ामलहरा सीट से विधायक रह चुकी हैं. कई सालों से पार्टी के लिए निष्ठावान तरीके से काम करने के लिए पार्टी ने रेखा यादव के नाम का ऐलान किया है.

शोभा ओझा के कोर्ट जाने के बाद रुक गई थी नियुक्ति

बता दें शोभा ओझा कांग्रेस की पुरानी नेता हैं. मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जब बनी थी तो शोभा ओझा को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था. लेकिन कमलानथ वाली कांग्रेस सरकार ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकी और 16 महीने बाद ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के विधायकों को लेकर बीजेपी में शामिल होने के बाद सरकार गिर गई. जिसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एमपी में नई सरकार का गठन हुआ. शिवराज सरकार ने शोभा ओझा को पद से हटा दिया था, जिसके बाद शोभा ओझा कोर्ट चली गईं और नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई थी.

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