‘प्रैक्टिकल में टॉपर को 10 और फेल छात्रों को 20 नंबर मिले’, गुना में भावुक छात्रा ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

छात्रा ने बताया कि उसकी प्रिंसिपल उषा कुशवाहा ने सालभर उसे प्रताड़ित करती रहीं. इतना ही नहीं प्रिंसिपल ने परीक्षा के कुछ दिन पहले ही प्रैक्टिकल में नंबर देने के लिए 5 हजार रुपये रिश्वत मांगे थे, पैसे ना देने पर प्रैक्टिकल में सबसे कम मार्क्स दिलवा दिए.
Complainant student Mehak Sharma.

शिकायतकर्ता छात्रा महक शर्मा.

MP News: ‘मैंने 12वीं क्लास में 69.2 प्रतिशत अंक लाकर पूरे स्कूल में टॉप किया. 10वीं क्लास में भी पूरे गांव में अव्वल रही. वार्षिक परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक लाने के बावजूद पूरे स्कूल में प्रैक्टिकल में सबसे कम 10-11 अंक दिए गए. जबकि फेल होने वाले छात्रों को 19-20 अंक दिए गए.’

ये कहना चांचौड़ा तहसील के बरखेड़ा खुर्द स्थित शासकीय विद्यालय की छात्रा महक शर्मा का है. कलेक्टर के सामने अपनी व्यथा सुनाते हुए छात्रा फफक पड़ी. मेधावी छात्रा के साथ हुए इस भेदभाव से कलेक्टर परिसर में मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया.

प्रिसिंपल पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप

मंगलवार को मेधावी छात्रा केलक्टर की जनसभा में पहुंची थी. इस दौरान छात्रा के पिता ने बताया कि उसकी बेटी ने स्कूल में टॉप किया था लेकिन फिर भी उसे प्रैक्टकल में सबसे कम अंक दिए गए, जबकि फेल होने वाले छात्रों को पूरे 20 अंक दिए गए. छात्रा ने कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है. छात्रा ने बताया कि उसकी प्रिंसिपल उषा कुशवाहा ने सालभर उसे प्रताड़ित करती रहीं. इतना ही नहीं प्रिंसिपल ने परीक्षा के कुछ दिन पहले ही प्रैक्टिकल में नंबर देने के लिए 5 हजार रुपये रिश्वत मांगे थे, पैसे ना देने पर प्रैक्टिकल में सबसे कम मार्क्स दिलवा दिए. क्लास में कुल 25 बच्चे थे, लेकिन सबसे कम नंबर मेधावी छात्रा के ही हैं.

छात्रा ने बताया कि प्रैक्टिकल में इतने कम अंक लाने के बाद उसकी मानसिक स्थिति सही नहीं है. इसकी जिम्मेदार कॉलेज कि प्रिसंपिल हैं. हालांकि कलेक्टर किशोर कन्याल ने छात्रा को आश्वासन दिया है कि वह नंबरों की रिटोटलिंग करवाएंगे और छात्रा के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. वहीं कलेक्टर के आश्वासन के बाद छात्रा वापस घर लौट गई.

कलेक्टर बोले -जांच के आदेश दिए गए हैं

कलेक्टर किशोर कन्याल ने बताया कि एक छात्रा आई थी, जिसके थ्योरी में अच्छे नंबर थे. लेकिन इसके बावजूद प्रैक्टिकल में उसके क्लास में सबसे कम नंबर हैं. इसको लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के आदेश दिए गए हैं.

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि जिस छात्रा के 70 प्रतिशत अंक आए हैं, उस हिसाब से प्रैक्टिकल में उसके काफी कम अंक आए हैं. इसको लेकर जांच करवाई जा रही है.

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