नोटों की गड्डियों और सोने-चांदी से सजता है रतलाम का मां लक्ष्मी दरबार, प्रसाद के रूप में मिलते हैं पैसे और आभूषण
रतलाम माणक चौक महालक्ष्मी मंदिर
Cash Jewellery Temple Decoration: रतलाम के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में हर साल भक्तों के धन से मां लक्ष्मी का दरबार सजाया जाता है. दिवाली पर्व शुरू होने से पहले ही भक्त मंदिर पहुंचकर अपना धन जमा कराना शुरू कर देते हैं. मंदिर समिति के सदस्य और पुजारी बाकायदा लोगों से धन लेते हैं और उसकी रजिस्टर में एंट्री की जाती है. इसके बाद नोटों की गड्डियों और सोने-चांदी के आभूषणों से पूरे मंदिर को सजाया जाता है. नोटों की लड़ियां और मालाएं बनाकर दीवारों से लेकर छत तक सजावट की जाती है. अलग-अलग डिजाइन में नोटों को सजाया जाता है.
वहीं सोने-चांदी के आभूषण भी मंदिर में रखे जाते हैं. कई संदूकों में नोटों के साथ सोना-चांदी भी दिखाई देता है. मान्यता है कि धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा में अपना धन रखने से संपत्ति में बढ़ोतरी होती है और पूरे साल मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. इसी आस्था के चलते रतलाम सहित प्रदेश और देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
आजादी के समय से चली आ रही है परंपरा
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि आजादी के समय से ही रतलाम के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में लोगों की गहरी आस्था रही है. यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और मां लक्ष्मी के दरबार में अपना धन जमा कराते हैं. धनतेरस के दिन विशेष पूजा की जाती है और भाई दूज के बाद सभी भक्तों को उनका धन वापस लौटा दिया जाता है. मंदिर में जमा धन की सुरक्षा के लिए परिसर के अंदर और आसपास के बाजार में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं. मंदिर के अंदर और बाहर निगरानी की जाती है. मंदिर से महज 10 कदम की दूरी पर माणक चौक थाना स्थित है. इसके अलावा पुलिस भी मंदिर के अंदर और आसपास तैनात रहती है.
भाई दूज तक सजता है मां लक्ष्मी का दरबार
माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में धनतेरस के अवसर पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती है. श्रद्धालु अपने साथ नोटों की गड्डियां और सोने-चांदी के जेवरात लेकर मंदिर पहुंचते हैं. इसके बाद मां लक्ष्मी का श्रृंगार किया गया और मंदिर को भक्तों के धन से सजाया जाता है. पिछले साल धनतेरस पर मंदिर में 5 करोड़ रुपये से ज्यादा के धन से विशेष पूजा की गई थी. वहीं भाई दूज तक मां लक्ष्मी का यह भव्य दरबार भक्तों के दर्शन के लिए सजा रहता है.
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प्रसाद के रूप में पैसे और आभूषण दिए जाते हैं
दूर-दराज से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि भक्तों द्वारा पूजा में शामिल कराए गए नोट और आभूषण भाई दूज के बाद प्रसाद के रूप में वापस दिए जाते हैं. श्रद्धालु इस धन को अपने घर ले जाते हैं. लोगों का विश्वास है कि मां लक्ष्मी के दरबार से लाई गई राशि से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती.