Dhar: भोजशाला में गोमूत्र से की शुद्धि, गर्भगृह में स्‍थापित की अखंड ज्योत, ASI की नई व्यवस्था के बाद पहली बार हुई मां वाग्देवी की पूजा

Dhar Bhojshala: भोज उत्सव समिति और हिंदू समाज के लोगों ने सूर्योदय के साथ मां वाग्देवी की आराधना की और निर्धारित समय पर आरती संपन्न की.
Worship of Mother Vagdevi at Bhojshala

भोजशाला में मां वाग्देवी की पूजा

Dhar Bhojshala: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रविवार को विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया. भोज उत्सव समिति और हिंदू समाज के लोगों ने सूर्योदय के साथ मां वाग्देवी की आराधना की और निर्धारित समय पर आरती संपन्न की. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे और पूरे परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा.

सुबह से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान

रविवार सुबह श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे. पूजा की शुरुआत परिसर को गंगाजल और गोमूत्र से शुद्ध करने के साथ हुई. इसके बाद गर्भगृह को रंगोली से सजाया गया और परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को गर्भगृह में स्थापित किया गया. सूर्योदय के साथ ही मंत्रोच्चार, देवी अनुष्ठान और वास्तु पूजन का सिलसिला शुरू हो गया. श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया.

गेट पर किया गया ध्वजारोहण

आरती के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ध्वजारोहण के लिए भोजशाला के गुंबद की ओर पहुंचीं. हालांकि सुरक्षा कारणों से गुंबद पर कांटेदार तार लगाए गए थे, जिसके चलते उन्होंने सीढ़ियों के ऊपर बने गेट पर ही ध्वज की पूजा-अर्चना कर ध्वजारोहण किया. उन्होंने कहा कि मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाना धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए यह निर्णय लिया गया.

भोजशाला को संवारने की तैयारी

सावित्री ठाकुर ने कहा कि पहले शुक्रवार के दिन यहां तनाव का माहौल रहता था, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो गई है और श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर पा रहे हैं. वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोजशाला को उसके पुराने वैभव के अनुरूप विकसित करने की बात कही है. सरकार का लक्ष्य है कि इस ऐतिहासिक स्थल को और भव्य स्वरूप दिया जाए ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां वाग्देवी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें.

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