MP News: दमोह में झाेलाछाप डॉक्टरों के जाल में फंस रहे मरीज! संदिग्ध इलाज में युवती की मौत, अब सिस्‍टम पर उठ रहे सवाल

MP News: दमोह जिले से सामने आया है, जहां 17 वर्षीय युवती की संदिग्ध इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा.
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सांकेतिक तस्‍वीर

MP News: मध्य प्रदेश में झोलाछाप और कथित फर्जी डॉक्टर लोगों की जान के दुश्मन बनते जा रहे हैं. इनके इलाज की कीमत अब मासूमों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है. ताजा मामला दमोह जिले से सामने आया है, जहां 17 वर्षीय युवती की संदिग्ध इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा.

दरअसल, जिले के पटेरा थाना क्षेत्र के महेवा गांव की रहने वाली 17 वर्षीय रिंकी वर्मन की इलाज के दौरान मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि बुधवार शाम अचानक रिंकी की तबीयत बिगड़ने पर उसे जल्दबाजी में बमनपुरा स्थित एक कथित झोलाछाप डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उसका इलाज किया गया. इलाज के बाद जब परिजन बेटी को लेकर घर लौटने लगे, तभी उसकी हालत और बिगड़ गई. आनन-फानन में उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां मौजूद ड्यूटी डॉक्टरों ने रिंकी को मृत घोषित कर दिया.

क्या मुर्दे का इलाज कर रहा था झोलाछाप डॉक्टर?

ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कथित झोलाछाप डॉक्टर एक मृत किशोरी का इलाज कर रहा था? इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है और लोग स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

पोस्टमार्टम में देरी पर भड़के परिजन

पोस्टमार्टम में हो रही देरी और बेटी की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल के बाहर शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया और जमकर प्रदर्शन किया. करीब एक घंटे तक सड़क पर हंगामा चलता रहा, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ. मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाइश दी, जिसके बाद मामला शांत हुआ. परिजनों ने कथित झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी डॉक्टरों के मामले

जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में इसी जिले के सिविल वार्ड नंबर 6 और न्यू दमोह में संचालित सरकारी संजीवनी आरोग्यम मंदिर में दो कथित डॉक्टरों की सीएमएचओ की जांच में एमबीबीएस की डिग्री फर्जी पाई गई थी. इसके आधार पर दोनों कथित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी. फिलहाल दोनों आरोपी जिला जेल में बंद हैं.

मंत्री के दावों पर उठे सवाल

14 मई को दमोह दौरे पर पहुंचे प्रभारी एवं तकनीकी शिक्षा और आयुष विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार ने दावा किया था कि सरकार ने विकास की अधोसंरचना के लिए राशि दी है. चाहे वह स्वास्थ्य, चिकित्सा या शिक्षा का क्षेत्र हो, सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है. उन्होंने कहा था कि एलोपैथी हो या आयुर्वेद, सरकार निरंतर काम कर रही है. हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है.

आयुष विभाग पर भी सवाल

मंत्री इंदर सिंह परमार के आयुष विभाग से जुड़े दो कथित फर्जी एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों का पकड़ा जाना भी पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. आखिर स्वास्थ्य व्यवस्था में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो रही है?

आखिर कब रुकेगी मासूमों की मौत?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक झोलाछाप डॉक्टरों के हाथों मासूमों की जान जाती रहेगी और प्रशासन ऐसे लोगों पर कब तक कार्रवाई करने से बचता रहेगा? स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां अब लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती नजर आ रही हैं.

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