ट्विशा की मर्डर मिस्ट्री में ऑडियो टेप की एंट्री! सास गिरीबाला सिंह और द्विशा के भाई के बीच बातचीत का दावा
आरोपी समर्थ सिंह पर इनाम घोषित
Twisha Sharma Death Case: भोपाल के चर्चित रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू द्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामले में हर दिन कुछ नए खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में अब कथित ऑडियो टेप सामने आया है. ऑडियो में द्विशा की सास रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह और द्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा के बीच बातचीत का दावा किया जा रहा है.
ऑडियो में द्विशा के पुराने रिश्तों और निजी जिंदगी को लेकर सवाल पूछने की बात कही जा रही है. मामले में परिवार के लोगों ने मानसिक प्रताड़ना और चरित्र पर सवाल उठाने का भी आरोप लगाया है. हालांकि अभी इस कथित ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है और विस्तार न्यूज भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है.
मामले में पुलिस प्रतिदिन करेगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
ट्विशा शर्मा मामले में अब भोपाल पुलिस प्रतिदिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी. मीडिया को हर रोज ट्विशा मामले का अपडेट दिया जाएगा. दोपहर 1:00 बजे कमिश्नर कार्यालय सभागार में प्रेस कांफ्रेंस होगी.
9 दिन से मर्चुरी में रखा है शव
ट्विशा शर्मा की मौत के 9 दिन गुजर जाने के बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हो सका है. उनका शव अब भी भोपाल एम्स की मर्चुरी में रखा हुआ है. पुलिस का कहना है कि लंबे समय तक शव रखे रहने की वजह से उसमें डिकंपोजिशन शुरू हो गया है, लेकिन परिवार अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है.
दोबारा पोस्टमार्टम के बिना नहीं होगा अंतिम संस्कार
परिजनों का कहना है कि जब तक दोबारा पोस्टमार्टम नहीं कराया जाएगा और मामले की जांच किसी दूसरे राज्य की एजेंसी को नहीं सौंपी जाएगी, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे. परिवार का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें दोबारा पोस्टमार्टम कराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में इससे इनकार कर दिया गया.
अदालत से राहत नहीं मिलने पर हाई कोर्ट जाने की तैयारी
इधर, दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को अदालत ने फिलहाल मंजूरी नहीं दी है. इसके बावजूद परिवार कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी में है. ट्विशा के परिजनों के वकील अंकुर पांडे ने बताया कि वे निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर करेंगे.
वकील बोले- कोर्ट ने पोस्टमार्टम पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई
वकील का कहना है कि अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई है, बल्कि केवल दिल्ली में पोस्टमार्टम कराने की अनुमति नहीं दी गई है. उनका दावा है कि यदि प्रशासन चाहता तो दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति दी जा सकती थी. अब परिवार हाई कोर्ट से इस मामले में राहत की उम्मीद कर रहा है.