Lohagad Fort History: भूतिया रहस्य और जानलेवा खाई…जानिए उस लोहागढ़ किले का सच, जहां केतन की मौत हुई
Lohagad Fort: पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की खबर ने देशभर के लोगों को हैरान कर दिया है. आरोप है कि मंगेतर सिया गोयल ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर केतन को महाराष्ट्र के फेमस और ऐतिहासिक लोहागढ़ किले की 400 फीट गहरी खाई में नीचे गिरा दिया. इस भयानक घटना के बाद से ही इस पुराने किले के खतरनाक रास्तों, ढलानों और गहरी खाइयों को लेकर सोशल मीडिया और खबरों में काफी बातचीत हो रही है. तो चलिए जानते हैं कि लोहागढ़ किले के क्या है इतिहास...
खूबसूरत होने के साथ-साथ लोहागढ़ किला अपनी कई डरावनी और अनसुनी कहानियों के लिए भी मशहूर है.
दावा किया जाता है कि इस 2000 साल पुराने किले में भूतिया हरकतें होती हैं, जो इसे महाराष्ट्र का सबसे रहस्यमयी स्थान बनाती हैं.
महाराष्ट्र पर्यटन के मुताबिक, इस किले को सबसे पहले सातवाहन राजवंश के राजाओं ने तैयार करवाया था.
बाद में यादव, बहमनी और बीजापुर के सुल्तानों ने इस पर राज किया और इसकी सुरक्षा को और मजबूत बनाया.
मराठा साम्राज्य के राजा छत्रपति शिवाजी महाराज ने साल 1648 में लोहागढ़ किले को अपने नियंत्रण में लिया था.
पुरंदर समझौते के कारण साल 1665 में उन्हें यह किला मुगलों को देना पड़ा, लेकिन साल 1670 में उन्होंने इसे वापस जीत लिया.
पुणे के लोनावला में स्थित यह ट्रेकिंग स्पॉट अपने 'विंचू काटा' हिस्से के लिए मशहूर है, जो बिच्छू की पूंछ जैसा दिखता है.
लोनावला के खूबसूरत पहाड़ों के बीच बना लोहागढ़ किला ट्रेकिंग करने वालों की सबसे पसंदीदा जगह है.
इसकी मजबूत बनावट, बड़े दरवाजे और हरियाली पर्यटकों को खींचती है, लेकिन बारिश और ठंड में यहां सावधान रहना बहुत जरूरी है.
शिवाजी महाराज की इस ऐतिहासिक धरोहर में पर्यटकों को गहरी खाइयों के पास सेल्फी लेते समय अलर्ट रहना चाहिए, क्योंकि जरा सी लापरवाही जानलेवा हो सकती है.
स्थानीय कहानियों के अनुसार, किले के निर्माण के समय दी गई इंसानी बलि और रात में दिखने वाले भूतिया साए इसे बहुत डरावना बनाते हैं.