एमपी का यह गांव है अनोखा, जहां आज भी अनपढ़ लोग बोलते हैं फर्राटेदार संस्कृत
Sanskrit speaking village Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में एक ऐसा अनोखा गांव है, जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है. इस गांव की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां लोग आपस में मिलने पर 'नमस्ते' या 'हेलो' नहीं कहते, बल्कि सीधे संस्कृत में बात करना शुरू कर देते हैं. चाहे दुकान हो, खेत हो या स्कूल, हर जगह लोग संस्कृत भाषा का ही इस्तेमाल करते हैं. इस गांव में कदम रखते ही ऐसा महसूस होने लगता है मानो हम पुराने पौराणिक काल में लौट आए हों. आइए जानते हैं उस गांव के बारे में.
इस गांव के घरों के बाहर से गुजरने पर लोगों के आपसी हाल-चाल जानने वाले संस्कृत शब्द साफ सुनाई देते हैं.
राजगढ़ से 40 किलोमीटर दूर झिरी गांव में बच्चे, बूढ़े और किसान सभी लोग आपस में सिर्फ संस्कृत में ही बात करते हैं.
दुकानों पर भी ग्राहक और दुकानदार आपस में बहुत ही सरलता, सहजता और मुस्कुराते हुए संस्कृत भाषा में ही सामान का लेन-देन करते हैं.
चायवाले से लेकर खेत के मजदूरों तक, गांव का हर व्यक्ति आपस में सिर्फ संस्कृत में ही बात करता है, जिसे देखकर कोई भी नया इंसान हैरान रह जाता है.
करीब 1500 की आबादी वाला यह साधारण सा गांव पहले पूरी तरह अनपढ़ था, लेकिन 20 साल पहले बुजुर्गों के प्रयास से आज यहां का हर व्यक्ति परफेक्ट संस्कृत बोलता है.
गांव वालों ने संस्कृत भारती संस्था की मदद से काम के बाद कक्षाएं लेकर संस्कृत सीखी और धीरे-धीरे इसे अपनी रोजमर्रा की भाषा बना लिया.
संस्था के स्वयंसेवी के संपर्क में आने के बाद विमला पन्ना नाम की युवती ने झिरी गांव आकर सभी को आसान तरीके से बोलचाल की संस्कृत सिखाकर वहां का माहौल पूरी तरह बदल दिया.
झिरी गांव में चौबीसों घंटे सिर्फ संस्कृत में बात करने वाले परिवारों के घरों पर 'संस्कृत गृहम' लिखा है, जहां बच्चों के झगड़े और गीत भी संस्कृत में सुनकर बाहर से आने वाले लोग हैरान रह जाते हैं.