वैसे तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा अपने विकास और सुधार के कामों के लिए पहचाने जाते रहे हैं, लेकिन अब कुछ अलग ही अंदाज में चर्चा में हैं. हाल ही में उनकी कुछ ऐसी 'हरकतें' हुईं, जिनसे उनका व्यक्तित्व नया मोड़ लेता हुआ दिखा और अब उनका हर एक कदम मीडिया की सुर्खियों में है.
Bihar Politics: बिहार विधान परिषद में एक बार फिर राजनीतिक तीरों की बौछार हुई. इस बार के अखाड़े में दो दिग्गज खिलाड़ी थे. एक तरफ थे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, और दूसरी तरफ थीं राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी. दोनों के बीच इस बार का विवाद न सिर्फ राजनीति की हवा को गरमाने […]
Bihar: निशांत कुमार की एंट्री और JDU में उनके रोल को लेकर अब बड़ा सवाल उठ रहा है. निशांत पार्टी कब ज्वाइन करेंगे और किस पद पर उनकी नियुक्ति होगी इसे लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि नीतीश कुमार निशांत के लिए रानजीतिक मंच तैयार कर रहे हैं.
Rabri Devi: बुधवार को MLC और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने नीतीश कुमार के ऊपर बड़ा बयान देते हुए कहा कि नीतीश कुमार सदन में भांग पीकर आते हैं और महिलाओं को अपमान करते हैं.
जब हम बात करते हैं कहार जाति की, तो यह जाति बिहार के सभी 38 जिलों में फैली हुई है, लेकिन सबसे अधिक संख्या में यह जाति गया जिले में पाई जाती है. 2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, कहार जाति की संख्या बिहार में 30 लाख से अधिक बताई गई थी. इसके अलावा, यह जाति चंद्रवंशी और रवानी जैसे नामों से भी जानी जाती है.
अब सवाल यह है कि क्या तेजस्वी यादव का यह आरक्षण का मुद्दा बीजेपी और एनडीए के लिए राजनीतिक खतरा साबित होगा या फिर हिंदुत्व की राजनीति के सामने यह मुद्दा ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगा? इस समय, नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों ही एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, लेकिन तेजस्वी यादव अपनी तरफ से हर उस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की कोशिश कर रहे हैं, जो उन्हें राजनीतिक फायदा दे सकता है.
सीएम नीतीश ने कहा कि उनके कार्यकाल में बिहार की तस्वीर बदल गई है. पहले जहां राज्य में अराजकता और विवाद थे, अब वहां बेहतर बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और सड़कें हैं. उन्होंने कहा कि अब बिहार में एक मजबूत पुलिस बल है और राज्य में अपराध कम हुए हैं.
नीतीश कुमार की सरकार में हाल ही में एक कैबिनेट विस्तार हुआ है. इस विस्तार में बीजेपी कोटे से 7 नए चेहरे मंत्री बनाए गए हैं. इन नए मंत्रियों में कृष्ण कुमार मंटू (छपरा, अमनौर), विजय मंडल (अररिया, सिकटी), राजू सिंह (साहेबगंज), संजय सारावगी (दरभंगा), जीवेश मिश्रा (जाले), सुनील कुमार (बिहारशरीफ) और मोती लाल प्रसाद (रीगा) का नाम शामिल है.
अगर हम इतिहास की बात करें, तो 20 साल पहले जेडीयू के पास बीजेपी से दोगुना अधिक मंत्री हुआ करते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. 2020 में जेडीयू के पास 19 मंत्री थे और बीजेपी के पास सिर्फ 7 मंत्री. धीरे-धीरे जेडीयू के मंत्री घटते गए, और बीजेपी के मंत्री बढ़ते गए. आज जेडीयू के मंत्री सिर्फ 13 हैं, जबकि बीजेपी के 21 मंत्री हैं.
पीएम मोदी का बिहार दौरा और उसके बाद नीतीश कुमार और जेपी नड्डा की बैठक यह साफ संकेत देती है कि राज्य में बीजेपी और जेडीयू का गठबंधन फिर से मजबूत हो सकता है. साथ ही, कुछ अन्य प्रमुख नेताओं की इसमें भूमिका अहम हो सकती है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत अन्य कई केंद्रीय नेता भी बिहार में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुके हैं.