अलीगढ़ कॉलेज में लंगूर बना कर्मचारी! बंदर भगाने के मिलते थे ₹12 हजार महीने, अब वन विभाग ने लिया एक्शन’

Aligarh Golu Langur: अलीगढ़ के एक कॉलेज में गोली नाम लंगूर नौकरी कर रहा था. इसके लिए कॉलेज की तरफ से उसे 12 हजार रुपये सैलरी दी जाती थी. लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो आने के बाद वन विभाग ने एक्शन लिया है.
कॉलेज में तैनात लंगूर की तस्‍वीर

कॉलेज में तैनात लंगूर की तस्‍वीर

Aligarh Golu Langur: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित धर्म समाज डिग्री कॉलेज में बंदरों के कारण हर कोई परेशान था. यही वजह है कि बढ़ती परेशानी से निपटने के लिए प्रशासन ने अनोखा रास्ता चुना है. कॉलेज परिसर में गोलू नाम के लंगूर को नौकरी पर रखा है. ताकि उसकी मौजूदगी से बंदर दूर रहें. इसके बदले लंगूर के मालिक को हर महीने 12 हजार रुपये दिए जा रहे थे. सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद अब यह चर्चा का विषय बन गया है. यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से चल रही थी.

कॉलेज में बंदरों का डर इस कदर बढ़ गया था कि छात्र-छात्राएं अकेले आने-जाने से बचते थे. कई बार बंदर क्लासरूम के बाहर बैठ जाते थे और खाने-पीने की चीजें छीन लेते थे. स्टाफ भी इस समस्या से परेशान था. ऐसे में प्रशासन ने सोचा कि प्राकृतिक तरीके से बंदरों को दूर रखने के लिए लंगूर की मदद ली जाए.

तय समय पर आता था गोलू

गोलू रोज तय समय पर कॉलेज लाया जाता था. सुबह से शाम तक वह परिसर में रहता और उसकी मौजूदगी भर से बंदरों के झुंड वहां से हट जाते थे. छात्रों का कहना है कि जब से गोलू आया, कैंपस का माहौल पहले से ज्यादा सुरक्षित लगने लगा. कई छात्र उसे देखने और उसके साथ फोटो लेने भी पहुंचते थे.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ गोलू

मामला तब चर्चा में आया जब किसी ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया. वीडियो में लंगूर को रस्सी से बांधा हुआ दिखाया गया. इसके बाद वन विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया और टीम को कॉलेज भेजा. जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जंगली जीव को इस तरह बांधकर रखना नियमों के खिलाफ है.

वन विभाग ने लंगूर को कराया आजाद

वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लंगूर को रस्सी से आजाद कराया. अधिकारियों ने कॉलेज प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि वन्यजीवों का इस तरह उपयोग करना उचित नहीं है. साथ ही जानवरों के साथ क्रूरता करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

घटना के बाद कॉलेज में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. एक ओर छात्रों और स्टाफ को बंदरों से राहत मिली थी, वहीं दूसरी ओर पशु संरक्षण और कानूनी नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. अब प्रशासन को बंदरों की समस्या का कोई नया और वैध समाधान तलाशना होगा.

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