‘अयोध्या के पटवारी’ चंपत राय का संघ में कैसे बढ़ा कद? अब राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उठे कई सवाल

Champat Rai RSS Journey: संघ के लोगों का कहना है कि चंपत राय संघ के लिए नींव का पत्थर के तरह काम करते थे. वे राम मंदिर के लिए घर-घर से ईंट जुटाने वाले अभियान के सूत्रधार रहे हैं.
Champat Rai Ram Mandir Trust Rise

चंपत राय का संघ में कैसे बढ़ा कद?

Why He Is Called Patwari: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा, वह है चंपत राय का. चंपत राय ने राम मंदिर से जुड़े 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर होने और उनकी गिरफ्तारी के बीच महासचिव पद -से इस्तीफा दे दिया है. जबकि चंपत राय का नाम एफआईआर में भी नहीं है. आइए जानते हैं कौन हैं चंपत राय, जिन्हें अयोध्या का पटवारी कहा जाता है. संघ परिवार में इतना बड़ा कद कैसे बढ़ा?

चंपत राय श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष भी हैं. उन्होंने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है. चंपत राय का संघ परिवार से बहुत गहरा नाता है. संघ के लोगों का कहना है कि चंपत राय का संघ परिवार में कब बड़ा होने की कई वजहे हैं. चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में शामिल रहे हैं. संघ के प्रचारक होने के नाते वे अपने परिवार से भी दूर हैं और संपत्ति बनाने जैसा तो उनके पास कुछ है ही नहीं. कई दशकों तक वे राम मंदिर आंदोलन के लिए डटे रहे. उनका राम मंदिर में काफी योगदान रहा है.

केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे चंपत राय

चंपत राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले हैं. बचपन से ही RSS की विचारधारा से प्रभावित रहने वाले चंपत राय बाद में संघ के साथ जुड़ गए. चंपत राय बिजनौर के धामपुर में स्थित आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे. साल 1975 की बात है जब देश में आपातकाल लागू हुआ था. उस दौरान चंपत राय को 1977 में कॉलेज से ही गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान वे करीब 18 महीनों तक जेल में बिताए. इसके बाद साल 1980 में वे विश्व हिंदू परिषद् से जुड़ गए.

राम मंदिर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

संघ के लोगों का कहना है कि चंपत राय संघ के लिए नींव का पत्थर के तरह काम करते थे. जब राम मंदिर से जुड़े लोगों पर मुकदमे दर्ज होते तो चंपत राय ही थे, जो लोगों को आंदोलन से जोड़ने का काम करते थे. उन्होंने आंदोलन से जुडे़ लोगों को भरोसा दिलाया कि जीत हिंदू पक्ष की ही होगी. चंपत राय को लेकर संघ परिवार के लोगों का कहना है के वे घर-घर से ईंट जुटाने वाले अभियान के सूत्रधार रहे हैं. इसलिए उनका कद संघ में काफी बड़ा रहा है. राम मंदिर से जुड़ी उनके पास कई जिम्मेदारियां थी, जिसकी वजह से उन्हें अयोध्या का पटवारी कहा जाता था.

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पहले भी उठ चुके हैं सवाल

ऐसा नहीं है कि चंपत राय का नाम पहली बार विवादों में आया है. इससे पहले भी वे सुर्खियों में रह चुके हैं. जब राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होनी थी. उस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें महासचिव पद से हटाने की मांग की थी. हालांकि, उस दौरान विवाद ज्यादा नहीं बढ़ा और चंपत राय महासचिव पद पर बने रहे, लेकिन अब चंदा चोरी मामले के बीच उन्होंने आज शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया है.

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